मुंबई। सैंकड़ो वेपर्स, नुकसान में कमी के समर्थकों, मेडिकल प्रोफेशनल्स और कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने साथ आकर देश में ई- सिगरेट्स और वेपिंग पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के निर्णय का विरोध किया। ई-सिगरेट यूजर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन, असोसिएशन ऑफ वेपर्स इंडिया (एवीआई) द्वारा नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। ग्राहकों के इस संगठन द्वारा मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में जागरुकता अभियान आयोजित किए गए जहां सरकारी अधिकारियों और पुलिस ने विरोध प्रदर्शन किए जाने के लिए अनुमति नहीं दी।
प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंध को सरकार द्वारा इरादतन नरसंहार करार दिया क्योंकि इस फैसले से मौजूदा वेपर्स जानलेवा धूम्रपान की ओर मुड़ेंगे और देश के 11 करोड़ धूम्रपान करने वाले लोग सुरक्षित पर्याय से वंचित होंगे। धूम्रपान के कारण हर साल भारत में करीब 10 लाख लोगों की मौत होती है। उन्होंन कहा कि सरकार का एकतरफा फैसला तंबाकू उद्योग में उनके निहित स्वार्थ पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सरकार सिगरेट के व्यापार को बचाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और इसके साथ ही मानव अधिकारों को नज़रअंदाज कर रही है क्योंकि जिन देशों में वेपिंग के लिए अनुमति दी गई है वहां धूम्रपान की दरों में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है।
प्रदर्शनकारियों ने अध्यादेश को वापिस लेने की मांग की है जो ई-सिगरेट्स के उपभोग, निर्माण, मैन्यूफैक्चरिंग, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है।
हार्म रिडक्शन के समर्थक और एवीआई डायरेक्टर सम्राट चौधरी ने कहा, “ असंवैधानिक और कठोर वैप प्रतिबंध के खिलाफ उनकी आवाज़ उठाने के लिए भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं। उनका संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रतिबंध को तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाए। ” उन्होंने आगे कहा, “ये बेहद आश्चर्यचकित करने वाला है कि सरकार ने माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय और इसके साथ ही मुंबई के स्थगन आदेश को नज़रअंदाज किया है और रिसर्च पर भी प्रतिबंध लाद दिया है। प्रतिबंध के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए हम प्रदर्शन करना जारी रखेंगे और इस तरह के विरोध प्रदर्शन देश के अन्य शहरों में भी आयोजित करेंगे। यदि सरकार हमारी मांगों को सुनने से इनकार करती है तो हमें कानूनी तौर पर इसे चुनौती देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
हैदराबाद में स्थित प्रदर्शन के राष्ट्रीय समन्वयक जगन्नाथ सारंगपानी ने कहा, “6 शहरों में से 3 शहरों में उन्हें विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई जो सरकार का तानाशाही रवैय्या दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा, “पर्याप्त रिसर्च, सभी हितधारकों के साथ चर्चा और हमारे चुने गए लोकप्रतिनिधियों द्वारा बहस के बगैर प्रतिबंध की घोषणा कैसे की जा सकती है? तंबाकू से नुकसान को कम करने वाले एक मार्ग के खिलाफ ये एक बिना सोची समझी प्रतिक्रिया है जिसके लिए प्रतिबंध की नहीं बल्कि नियम बनाए जाने की आवश्यकता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी नीति के संबंध में इस तरह निपटा जाना योग्य नहीं है।”
दिल्ली से कनव ऋषिकुमार, एक पूर्व धूम्रपान करने वाले जिन्होंने वेपिंग के ज़रिए इस लत से छुटकारा पाया, ने कहा, “ एक ऐसे अध्यादेश को लाना जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है, ये सरकार का अमानवीय चेहरा है। सरकार के पास वैश्विक रिसर्च को नज़रअंदाज़ करने और पूर्वाग्रह से ग्रसित अध्ययन के आधार पर फैसला करने का दुस्साहस है जबकि वो देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी, आईटीसी में 28 % हिस्सेदारी रखती है। ”
दवाईयां बनाने वाले पुणे के धवल गोगाटे का कहना है, “हमारे लोकतांत्रिक देश के नागरिकों के लिए ये एक काला दिवस है। भारत में तंबाकू के सेवन का लंबा इतिहास है जो कई सदियों पुराना है। इसके साथ ही हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी धूम्रपान करनेवाली आबादी है। ऐसे परिदृश्य में ये अनिवार्य है कि सरकार धूम्रपान करनेवालों के लिए ई-सिगरेट्स और धुएंरहित तंबाकू के यूज़र्स के लिए स्नस जैसे वैज्ञानिक दृष्टि से साबित किए गए सुरक्षित पर्यायों को प्रोत्साहन दे। ई-सिगरेट्स पर प्रतिबंध किसी भी तर्क से परे है और पूर्वाग्रह से ग्रसित है। जनता के स्वास्थ्य के हित में हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वो अपने फैसले पर एक बार फिर पुनर्विचार करे। ”.
कैरी एडवर्ड्स, चेन्नई के एक मीडिया कंसल्टेंट जो वेपिंग की ओर मुड़ने से पहले करीब 23 साल तक 40 सिगरेट का सेवन करते थे, ने कहा “स्विचिंग करने के बाद दो सप्ताह में मैं वो कर पाया जो मैं इससे पहले कभी नहीं कर पाया था – मैंने धूम्रपान करना छोड़ दिया। वेपिंग करने से पिछले दो साल में, मेरी सांसों की घरघराहट जा चुकी है, मेरी आवाज़ साफ है मैं सीढियां आराम से चढ़ सकता हूं और जब मैं सांस लेता और छोड़ता हूं तो मेरे फेंफड़ों से कोई आवाज़ नहीं आती। ये एकदम साफ है कि इस फैसले के पीछे सरकार का निहीत स्वार्थ छुपा हुआ है।”
बेंगलुरु से एक और वेपर ने कहा कि यदि सरकार लाखों लोगों के अधिकारों को नज़रअंदाज करना जारी रखेगी तो वेप प्रतिबंध के खिलाफ लड़ाई को और तेज़ कर दिया जाएगा।
कानूनी बिरादरी का कहना है कि ई-सिगरेट पर लगाया गया प्रतिबंध संविधान के संदर्भ में अधिकारातीत है। बेंगलुरु से वकील पिंगल खान का कहना है , “सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों से निपटते वक्त ये अनिवार्य है कि सरकार अपने नागरिकों के प्रति एक अभिभावक की तरह कार्रवाई करे। ई-सिगरेट के बारे में वैज्ञानिक दृष्टि से ये सिद्ध हो चुका है कि धूम्रपान की लत से छुटकारा दिलाने का ये सबसे प्रभावी तरीका है और इसे छीनकर सरकार ने न सिर्फ उसके 11 करोड़ नागरिकों को बदहाल जिंदगी और अंधेरे भविष्य में धकेल दिया है बल्कि उनके परिवारों को भी खतरे में लाकर खड़ा कर दिया है। सरकार ने एक अभिभावक के तौर पर उसकी ज़िम्मेदारियों का त्याग कर दिया है और उसके नागरिकों के साथ एक ट्रेडर की तरह व्यवहार करने का फैसला किया है – कुछ चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए ऊंची आय और बेहतर फायदे हेतु उनकी ज़िंदगी और भविष्य का व्यापार किया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल नई दिल्ली के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अपराजित कार का कहना है, “ई सिगरेट्स परंपरागत सिगरेट्स की तरह तंबाकू नहीं जलाते जिसके चलते तारकोल या कार्बन मोनोक्साइड का निर्माण नहीं होता जो परंपरागत सिगरेट्स के दो सबसे ज़्यादा नुकसान करनेवाले तत्व हैं। इसके अलावा, अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि वेपिंग से अन्य लोगों को नुकसान होता है जो सिगरेट के धुएं से दूसरों को होने वाले नुकसान के विपरीत है जिससे हर साल 800,000 लोगों की मौत होती है। ”
किशोरवयीन बच्चों को लेकर सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे भय की ओर इशारा करते हुए गोवा के मीडिया प्रोफेशनल ओलिवियर वुलिएमी ने कहा, “जबकि हमारे सभी दावे वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर हैं, हम सरकार द्वारा बताए जा रहे भारत में युवाओं के बीच वेपिंग ‘महामारी’ की मौजूदगी से जुड़ी जानकारी का अब भी इंतज़ार कर रहे हैं।”
दशकों धूम्रपान करने के बाद वेपिंग की ओर मुड़े पचास साल की उम्र में प्रवेश कर चुके मनीष कसेरा, ने कहा, “हमारे सरकार में प्रतिबंध के लिए असली कारणों को बताने की ईमानदारी नहीं है। 68 देशों ने इसे प्रतिबंधित करने के बजाय इसके लिए नियम बनाए हैं। किशोरवयीन बच्चों में वेपिंग ‘महामारी’ ये बगैर किसी रिसर्च या आँकड़ों के बढ़ाचढ़ा कर बताया गया मिथक है। ये स्पष्ट है कि ये तंबाकू उद्योग के बचाव और कर वसूली के लिए है। बाकी सब आँखों में धूल झोकने के समान है।”
बेंगलुरु के कलाकार कमल भट्टाचार्य ने सवाल किया, “सिगरेट्स,गम्स और पैचेस के रुप में निकोटिन व्यापक तौर पर और आसानी से उपलब्ध है। वेपिंग निकोटिन को सांस में खींचने का एक और तरीका मात्र है। तो फिर सरकार ने केवल इस कैटेगरी पर ही प्रतिबंध क्यों लगाया है? सरकार ने सिगरेट्स को आसानी से बेचे जाने की अनुमति दी और लोगों को इसकी लत लग गई और अब इस राक्षस को नेस्तनाबूत करने के लिए और लोगों को इस लत से छुटकारे के लिए प्रभावी तरीकों की अनुमति देकर उन्हें थोड़ी सी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।”
ग्राहकों के संगठन द्वारा ई-सिगरेट्स पर प्रतिबंध और इसके साथ ही रिसर्च पर लगाए प्रतिबंध के विरोध में और भी प्रदर्शन किए जाने की योजना है। ई-सिगरेट्स के ज़रिए नुकसान में होने वाली कमी के बारे में भी जागरुकता फैलाई जाएगी। प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री को एक याचिका पर हस्ताक्षर और टेस्टिमोनियल्स लिखे गए जिसे अधिकारियों को भेजा जाएगा।
वेप प्रतिबंध के खिलाफ विशाल प्रदर्शन; प्रदर्शनकारियों ने इसे नरसंहार बताया

