मुंबई। दक्षिण मुंबई कालबादेवी में शाशन श्री साध्वी केलाशवति जी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा – तप के दो अक्षर है त और प ,तो का अर्थ है तपना ,ओर प का अर्थ है पाप को जो व्यक्ति आपको तप रूपी अग्नि पर तपाता है वह अपने आप को कुंन्दन बना लेता है। तपस्या के द्वारा पूर्व संचित कर्मों का क्षय होता है ।आज जितेंद्र जी एवं राखी सालेचा के धर्म चक्र की तपस्या संपन्न होने जा रही है जोड़े से की जाने वाली है तपस्या सबके मन को हर्षित करती है और इस तप से सभी को प्रेरणा लेनी है तपस्या के प्रांगण में सभी को तप करना है।
साध्वी पंकज श्री जी ने प्रोग्राम का संयोजन करते हुए कहा तप क्या है ? तब एक अग्नि है और अग्नि का स्वभाव है वस्तु को जलाना , ऊपर उठना। ठीक इसी प्रकार तक रूपी अग्नि में मल विकार जल जाते हैं और आत्मा ऊर्ध्वारोहण होता है । तप से दु:ख नहीं सुख प्राप्त होता है अनेक अनेक बीमारियो का समन होता है । सावन की रिमझिम में तपस्या की रिमझिम चल रही हैं आज जितेंद्र एवं राखी सालेचा ने धर्म चक्र रूपी एक अच्छी तपस्या की है उनके प्रति मंगल कामना उनके जीवन में तपस्या के फूल ज्यूं खिलते रहे ।
साध्वी सम्यक्तव यशा ने कहा तपस्या मन व भावों को मजबूत बनाती है। ते.यु. परिषद के अध्यक्ष पवन बोलियां एवं महिला मंडल की संयोजिका उर्मिला जी कछारा अपने विचारों के माध्यम से तप अनुमोदना की,ते.यु. परिषद के द्वारा तप अभिनंदन गीतिका ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला मंडल ने भी गीतिका के द्वारा तप अभिनंदन किया।
महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन के अध्यक्ष किशनलाल जी डागलिया, मुंबई प्रचार मंत्री नीतेश धाकड़, पवन बोलिया, उपाध्यक्ष अशोक बरलोटा, महिला मंडल की संयोजिका उर्मिला कछारा ,सहसंयोजिका सुमन कावड़िया, रेनू डागलिया, रुक्मणि कछारा,पूजा राठोड़ आदि ने तपस्वी भाई जितेन्द्र जी सालेचा एवं राखी सालेचा का साहित्य के द्वारा अभिनंदन किया।
तप अभिनन्दन में उमडा तेरापंथ समाज

