जालना। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की प्रेरणा और राष्ट्रीय उपासक संयोजक के निर्देशन में जालना में प्रवक्ता उपासिका श्रीमती रचना हिरण, सहयोगी उपासिकाएं श्रीमती मंजू हिरण श्रीमती प्रीति रांका वहाँ धर्म आराधना करवा रहें है। तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के अंतर्गत तृतीय दिवस को “सामायिक दिवस” के रूप में श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर प्रवक्ता उपासिका श्रीमती रचना हिरण ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में शुद्ध सामायिक की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामायिक आत्मविकास, आत्मविश्वास व समता की साधना का सशक्त माध्यम है। पाप से बचाव और संयमपूर्ण जीवन के लिए सामायिक अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को सामायिक की पचरंगी साधना करने की प्रेरणा दी।
उपासिका श्रीमती मंजू हिरण ने अपने उद्बोधन में लेश्या के छह प्रकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने राजा अरिमर्दन की कथा के माध्यम से समझाया कि हमारे शुभ-अशुभ भाव किस प्रकार हमारे वर्तमान जीवन व आगामी गति को प्रभावित करते हैं। श्रीमती प्रीति रांका ने अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया, जिसकी शुरुआत त्रिपदी वंदना से हुई। तत्पश्चात् ‘ॐ अ सी आ उ सा नमः’ का जप, ध्यान और स्वाध्याय कराया गया। कार्यक्रम का समापन परमेष्ठी वंदना के सामूहिक संगान के साथ हुआ। इस अवसर पर तेरापंथ भवन में नमस्कार महामंत्र का अखंड जाप भी चल रहा है, जो वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर रहा है।
कार्यक्रम में जालना युवक परिषद के परेशजी धोका ने आवश्यक सूचनाएं प्रदान कीं। महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती ज्योतिबाला जी एवं अनेक श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष सफल बनाया।
तेरापंथ भवन, जालना में पर्युषण महापर्व का तृतीय दिवस “सामायिक दिवस” के रूप में मनाया गया

