आगरा, डॉ.राहुल सिंघई।।
देश पर साठ साल तक राज करने वाली कांग्रेस प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने के बाद जोश में हो, लेकिन यहां तो संजीवनी की दरकार है। इंदिरा लहर के बाद विस और लोस चुनाव से वनवास पर गई पार्टी अब तक वेटीलेंटर के हालात है। 2009 के उपचुनाव को छोड़कर हर चुनाव में प्रत्याशियों को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। इसका असर यह हुआ कि बीते विस चुनाव में गठबंधन में पांच में से एक सीट भी कांग्रेस के खाते में नहीं आई।
देश के पहले चुनाव में रघुवीर सिंह फीरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र के पहले सांसद बने थे, लेकिन अगले चुनाव में कांग्रेस के हाथों से सीट छिन गई। इसके बाद एक बार कांग्रेस-एक बार अन्य का सिलसिला चलता रहा। मुलायम सिंह के राजनीतिक उदय के बाद फीरोजाबाद में उनका प्रभाव बढ़ा और पार्टी के गठन के बाद फीरोजाबाद की पहचान सपा के गढ़ के रूप में होती गई। इसके साथ ही कांग्रेस का पतन होता गया और लड़ाई भाजपा और सपा की हो गई। भाजपा ने 1991 से 1998 के बीच हुई तीन लोस चुनावों में लगातार जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद भाजपा पटरी से उतर गई और सपा राज चलता रहा।
1984 में इंदिरा लहर में कांग्रेस ने लोकसभा सीट तो जीती, मगर विस में प्रदर्शन गड़बड़ा गया। जिले की चार सीटों में से केवल टूंडला में कांग्रेस के अशोक सेहरा अपनी विरासत वाली सीट बचा पाए। बाद में हाल यह हुआ कि 2007 में विस चुनाव में कांग्रेस को टूंडला सीट पर महज 800 वोट मिले। कांग्रेस के बुजुर्ग नेता कहते हैं कि जातीय राजनीति का शिकार हुई कांग्रेस संभल नहीं पाई और डूबती चली गई। इसके साथ स्थानीय गुटबाजी भी बढ़ती गई।
2009 में जिंदा हुई थी कांग्रेस
सिने स्टार और पुराने समाजवादी रहे टूंडला के राजबब्बर कांग्रेस की टिकट पर 2009 में उपचुनाव में मैदान में उतरे। जिलाध्यक्ष हरीशंकर तिवारी बताते हैं कि यह सच है कि कांग्रेस को संजीवनी की जरुरत है, मगर चेहरा हो तो हम बाजी पलट सकते हैं। 2009 के चुनाव में कांग्रेस को पांच हजार वोट मिले थे, वहीं उपचुनाव में राजबब्बर 90 हजार वोटों से जीते थे। सैफई परिवार के आमने-सामने आने के बाद अब वीआइपी सीट हो गई है, हम इस बार हम बड़े चेहरे की मांग कर रहे हैं।
पहले से अब तक
– 1952 रघुवीर सिंह कांग्रेस
– 1957 ब्रजराज सिंह सेसोपा
– 1962 शंभूनाथ चतुर्वेदी-कांग्रेस
– 1967 शिवचरनलाल वाल्मिकी-सेसोपा
– 1971 छत्रपति अम्बेश-कांग्रेस
– 1977 रामजीलाल सुमन-जनता पार्टी
-1980 राजेश कुमार दमकिपा
– 1984 गंगाराम कांग्रेस
– 1989 रामजीलाल सुमन-जनता दल
– 1991 प्रभूदयाल कठेरिया-भाजपा
– 1996 प्रभूदयाल कठेरिया-भाजपा
– 1998 प्रभूदयाल कठेरिया-भाजपा
– 1999 रामजीलाल सुमन-सपा
– 2004 रामजीलाल सुमन-सपा
– 2009 अखिलेश यादव-सपा
– 2009 उपचुनाव-राजबब्बर-कांग्रेस
– 2014 अक्षय यादव-सपा
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