दोहा:पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ही अमेरिाक-तालिबान वार्ता गुप्त रूप से शुरू हो गई थी। तालिबान ने इस बात की जानकारी दी। दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक कायार्लय के प्रवक्ता ने कहा कि दोहा में हस्ताक्षरित शांति समझौते के साथ संपन्न हुई अमेरिका-तालिबान वार्ता पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के साथ शुरू हुई थी, लेकिन इसे गुप्त रखा गया था।
एफे न्जूय ने तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन के हवाले से कहा कि तालिबान को उम्मीद है कि 14 महीनों के भीतर अंतर्राष्ट्रीय सैनिकों की वापसी से पहले वह अफगान सरकार के साथ एक समझौते पर पहुंच जाएगा।
शाहीन ने कहा, “अमेरिका के साथ एक समझौते पर पहुंचने में लंबा समय लगा क्योंकि बातचीत कुछ साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन वह मीडिया की नजरों से दूर थी। ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के दौरान सारी बाते खुलकर सामने आईं और मीडिया को भी इसकी जानकारी बताई गई।” हालांकि, प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि वार्ता कब शुरू हुई थी, लेकिन उसने इशारों में बताया कि यह ‘ओबामा प्रशासन के दौरान’ से चल रही थी।
अमेरिका-तालिबान में शांति समझौता
अमेरिका ने तालिबान के साथ शनिवार (9 फरवरी) को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए और 14 माह के भीतर अपने सारे सैनिकों को वापस बुलाने की एक रूपरेखा भी पेश की। इस समझौते के साथ ही तालिबान और काबुल सरकार के बीच भी बातचीत की उम्मीद जगी है जिससे 18 साल से चल रहे संघर्ष के भी खत्म होने के आसार है। दोहा के एक आलीशान होटल में तालिबान के वार्ताकार मुल्ला बिरादर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए वहीं दूसरी ओर से अमेरिका के वार्ताकार ज़लमय खलीलजाद ने हस्ताक्षर किए। इसके बाद दोनों ने हाथ मिलाए। इस दौरान होटल के कॉन्फ्रेंस कक्ष में लोगों ने ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाए।
यह समझौता अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की देख रेख में हुआ। उन्होंने अलकायदा से संबंध समाप्त करने की प्रतिबद्धता भी तालिबान को याद दिलाई। समझौता होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान के लोगों को नए भविष्य के लिए बदलाव को अपनाने की अपील की थी। उन्होंने हस्ताक्षर कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर कहा, ”अगर तालिबान और अफगान सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर पाते हैं तो हम अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकेंगे और अपने सैनिकों को घर वापस ला पाएंगे।”

