सूरत (गुजरात)। विकास धाकड़ /तेरापंथ भवन, सिटीलाइट में आयोजित व्यक्तित्व विकास कार्यशाला के तहत “महिमा जन्मदाता की” विषयक कार्यशाला में उपस्थित विशाल परिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी प्रोफेसर मंगलप्रज्ञा जी ने कहा-जन्मदाता मां पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, उपकार कभी भुलाया नहीं जा सकता। जन्मदाता सृष्टि की वो कृति है जिन्हें बार-बार नमन करने को मन करता है, मां त्याग का यश, ममता का सागर है। इनकी ममता के आगे हिमालय भी बौना है। पौराणिक त्रेता, द्वापर और वर्तमान हर युग में माँ का ममत्व एक जैसा रहा है। संतान की प्रथम गुरु और शुभ भविष्य की निर्माता माँ है। माँ के सद्संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं। इसकी बदौलत ही दुनियां में महापुरुषो की लम्बी कतार खड़ी हुई । माँ, बाप की दुआ, आशीर्वाद जिन्दगी भर काम करता है । एक पिता परिवार रूपी फ्लाइट का पायलट है।
प्रो.साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने दिल छूने वाली, अनेक मार्मिक घटनाओं का जिक्र किया । इमोशनल, मार्मिक विषय का प्रवचन कर परिषद भावुक हो उठी। अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। उन्होंने कहा-माँ-बाप अपनी संतान के लिए जिंदगी भर ATM बने रहे. संतान-का कर्तव्य है वे आधार कार्ड अवश्य बने। उनके अनुभवों से जिंदगी की राह को निर्बाध बनाएं क्योंकि जन्मदाता शक्ति का अहसास है।
कार्यक्रम में साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी अतुलयशा ,साध्वी डॉ राजुल प्रभा , साध्वी डॉ चैतत्य प्रभा और साध्वी शौर्य प्रभा ने जीवन दाता की महिमा का क्या गाएं गान ? गीत का सामूहिक संगान किया। साध्वी डॉ शोर्य प्रभाजी ने कहा- जन्मदाता अभिभावक, परिवार के संरक्षक होते हैं, ढाल की तरह वे अपनी संतानों की रक्षा करते हैं, संस्कारों को सिंचन से सुरभित करते हैं। अपने संयोजकीय वक्तव्य में साध्वी डॉ राजुल प्रभाजी ने माँ-पिता को रुपी दैविक शक्ति के चरणों में मस्तक झुकाने वाले शक्ति का अहसास करता है।
इस अवसर पर साध्वी प्रो. मंगल प्रज्ञा जी ने सेवारत अपनी संसारपक्षीय माँ महादानी श्रद्धा की प्रतिमूर्ति सुमंगल साधिका भीखी देवी सेठिया एवं दिवंगत पिता महादानी प्रावक जी सेठिया के प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञाप्ति की।
सूरत में व्यक्तित्व विकास कार्यशाला का आयोजन
Highlights
- माता-पिता के आधार कार्ड बनें उनकी संतानः प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा

