सूरत {गुजरात} विकास धाकड़/ प्रोफेसर साध्वी मंगल प्रज्ञा,सामायिक दिवस के अवसर पर उपस्थित विशाल धर्म परिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी प्रोफेसर मंगलप्रज्ञा जी ने कहा-समता की आय ही स्वप्रायिक है। मात्र कटरी परिवेश ही सामायिक नहीं है- समायिक का अर्थ है- भीतरी जागरुकता बढाना और माया को कम करना । सामायिक साधकों के जीवन में शान्ति का अवतरण होना चाहिए। समय को सामायिक साधना के लिए संयोजित करना चाहिए। पर्युषण कालीन चतुर्दशी के अवसर पर प्रोफेसर डॉ.साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने हाजरी का वाचन करते हुए फरमाया-तेरापंथ धर्म संघ मर्यादित, अनुशासित प्राणवान संघ है आचार्यश्री-भिक्षु साधना के मूनियम थे। तेरापंथ के सभी आचार्य ने समय-2 पर संघ संवर्धन के लिए अपने चिन्तन को नियोजित किया।
परिषद को प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा- सम्यक्त्व पुष्ट बने ऐसा प्रयास हो । तेरापंथ के सिद्धान्त सुरक्षित रहने चाहिए-प्रवाह पातिता त्याज्य है। इस अवसर पर जसोल समदड़ी टापरा, पारलू, बायतू – बाडमेर, मारवाड़ गढ़सीवाना, निवासी सूरत प्रवासी श्रावक-श्राविकाओं द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। साध्वी सुदर्शन प्रभा जी ने पर्युषण को अभिनय सामायिक को रंग विषय का प्रतिपादन किया। साध्वी सुदर्शन प्रभाजी, साध्वी अतुलयशा जी, साध्धी डॉ राजूलप्रभाजी,साध्वी डॉ चैतन्य प्रभा जी और साध्वी डॉ शौर्य प्रभा जी ने आठ कर्मों का प्रहार – उज्ज्वल आत्मा का अवतार कार्यक्रम प्रस्तुत किया एवं सामायिक समता की अनुपम साधना गीत का संगान किया। चन्दनबाला के तेले करने वाले साधक साधिकाओं को प्रव्याख्यान करवाया गया । श्री अश्विनी मेहता ने 25 तप का प्रत्याख्यान किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी अतुल यशा जी ने किया। साध्वी डॉ राजुल प्रभा जी ने अभिनव सामायिक का प्रयोग कारवाया।
सूरत {गुजरात} पर्युषण का तीसरा दिन- सामायिक दिवस,सामायिक का अर्थ है- समता का आगमन

