By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: ”सोने के भाव: सवाल सिर्फ ‘कब’ का नहीं, ‘क्यों’ समझने का है”
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
Business

”सोने के भाव: सवाल सिर्फ ‘कब’ का नहीं, ‘क्यों’ समझने का है”

Last updated: April 12, 2026 1:45 pm
Surabhi Saloni
Share
6 Min Read
SHARE

हाल ही में ज्वेलरी बाजार के एक बहुत बड़े और अनुभवी कारोबारी का फोन आया। उम्र करीब 76 साल, बचपन से अपने पिताजी के साथ यही व्यापार, और आज एक बड़ा प्रतिष्ठित स्थापित नाम—लेकिन उनका सवाल था, “सोने के दाम इतने ऊपर चले गए, अब क्या वापस नीचे आएंगे? और आएंगे तो कब?” सच कहूँ तो एक पल के लिए मुझे आश्चर्य हुआ, लेकिन अगले ही क्षण यह अहसास भी हुआ कि यह सवाल सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि हजारों-लाखों व्यापारियों और आम लोगों के मन में भी यही जिज्ञासा है। मैंने उन्हें सीधे जवाब देने के बजाय कुछ आसान सवाल पूछने शुरू किए-ताकि जवाब उन्हें खुद समझ में आ जाए। मैंने पूछा, “आपने अपने इतने वर्षों के अनुभव में क्या कभी सोने के दामों में ऐसी तेजी देखी है?” उन्होंने तुरंत कहा, “नहीं, कोविड के बाद जैसी तेजी मैंने कभी नहीं देखी।” फिर मैंने पूछा, “जब कोविड में लॉकडाउन लगा था, तब शेयर बाजार का क्या हुआ था?” उन्होंने कहा, “सेंसेक्स गिर गया था और सोना तेजी से बढ़ गया था।” बस यहीं से हमने बात को थोड़ा और खोलना शुरू किया।
मैंने उनसे कहा, “जरा पुराने दिनों को याद कीजिए-जब हमारे व्यापार में सीजन खत्म हो जाता था और दुकान में पैसा खाली पड़ा रहता था, तब आप क्या करते थे?” उन्होंने कहा, “हम उस पैसे को ब्याज पर दे देते थे, सराफी में लगाते थे।” मैंने कहा, “बिलकुल सही, वही आज की भाषा में डेब्ट मार्केट है।” फिर मैंने एक और सवाल किया—“अगर आपको ब्याज अच्छा मिल रहा हो, तो क्या आप अपना पैसा सोने में फँसाएंगे?” उन्होंने कहा, “नहीं, फिर तो हम ब्याज पर ही लगाएंगे।” यहीं से पूरी बात साफ होने लगती है। मैंने उन्हें समझाया कि विदेशों में, खासकर बड़े विकसित देशों में, कई बार ब्याज दरें बहुत कम या शून्य के आसपास होती हैं। अब सोचिए, अगर वहां के बड़े निवेशकों को बैंक में पैसा रखने पर कुछ खास रिटर्न नहीं मिल रहा, और ऊपर से शेयर बाजार भी गिर रहा हो, तो वे अपनी बड़ी-बड़ी रकम कहाँ लेकर जाएंगे? उनके पास सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प क्या बचता है? जवाब है-ऑनलाइन सोना।
यही कारण था कि कोविड के समय जब पूरी दुनिया के शेयर बाजार गिरे, तो बड़े-बड़े निवेशकों ने अपना पैसा निकालकर सोने में लगा दिया। और जब इतनी बड़ी मात्रा में खरीदारी होती है, तो क्या दाम नहीं बढ़ेंगे? स्वाभाविक है कि सोने के भाव तेजी से ऊपर गए। अब मैंने उनसे दूसरा पहलू पूछा-“क्या आपने ध्यान दिया कि जब भी दुनिया में संकट आता है, तो डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर?” उन्होंने कहा, “हाँ, ऐसा तो होता है।” फिर मैंने समझाया-“हमारे देश में सोना पैदा नहीं होता, हमें उसे बाहर से खरीदना पड़ता है और भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। अब अगर डॉलर महंगा हो गया और रुपया कमजोर हो गया, तो क्या सोना अपने आप महंगा नहीं हो जाएगा?” उन्होंने कहा, “हाँ, यह तो सही है।”
अब धीरे-धीरे पूरी तस्वीर साफ हो चुकी थी। मैंने उनसे कहा-“तो अब आप खुद सोचिए, जब सोने के दाम बढ़ने के ये कारण हैं-जैसे शेयर बाजार में गिरावट, ब्याज दरों का कम होना, डॉलर का मजबूत होना—तो जब ये स्थितियां उलटी होंगी, तब क्या होगा?” यानी अगर शेयर बाजार फिर से अच्छा प्रदर्शन करने लगे, ब्याज दरें बढ़ जाएं, निवेशकों को दूसरे विकल्प बेहतर दिखने लगे और रुपया मजबूत हो जाए—तो क्या वे सोने में पैसा लगाए रखेंगे? या फिर वहां से पैसा निकालकर दूसरे निवेश में लगाएंगे? जाहिर है, ऐसी स्थिति में सोने के दाम या तो स्थिर होंगे या नीचे आ सकते हैं।
बात खत्म होने तक उनकी जबान पर संतोष था और मन में एक नई समझ-कि बाजार में अनुभव कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर हम कारणों की गहराई नहीं समझते, तो सवाल बने ही रहते हैं। यही बात आम जनता पर भी लागू होती है। हमें यह समझना होगा कि सोने के भाव सिर्फ मांग और सप्लाई से नहीं चलते, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति, निवेशकों की सोच, ब्याज दरें और मुद्रा की ताकत-इन सबका मिला-जुला असर होता है।
इसलिए अगली बार जब हम सुनें कि सोना ऊपर जा रहा है या नीचे आ रहा है, तो सिर्फ भाव मत देखिए—यह समझने की कोशिश कीजिए कि इसके पीछे कारण क्या हैं। जब कारण समझ में आ जाएंगे, तो भाव अपने आप समझ में आने लगेंगे। और यही समझ हमें एक साधारण व्यापारी से समझदार निवेशक बनाती है-क्योंकि धंधा करना भले ही एक कला हो, लेकिन संपत्ति बनाना हमेशा एक विज्ञान होता है।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article मशहूर पार्श्व गायिका आशा भोसले का निधन, भारतीय संगीत जगत में एक युग का अंत
Next Article ”णमो अरिहंताणं” पाठ को लेकर भ्रम, भाषाई संदर्भ को ‘नवकार मंत्र’ बताने पर उठे सवाल

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को स्मरण किया, स्वतंत्रता सेनानियों के साहस की सराहना की
national
August 9, 2026
किंग, प्रिंस और शेर फिर लौट आए! ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के ट्रेलर से पहले मेकर्स ने जारी किए चार दमदार नए पोस्टर
entertainment
August 9, 2026
सम्यक्त्व की दृढ़ता, ईर्ष्या का त्याग और कर्मों की समझ आत्मकल्याण का मार्ग
social
August 9, 2026
सुख-दुःख कर्मों का खेल, समता रखना ही सच्ची साधना : डॉ. श्री पदमचन्द्रजी म.सा.
social
August 9, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?