नई दिल्ली:दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ शनिवार को चार्जशीट दाखिल कर दी है। शरजील पर 15 दिसंबर 2019 को जामिया में देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने का आरोप है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए ( देशद्रोह और दो वर्गों के बीच भेदभाव) के तहत केस दर्ज किया गया था।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान देशविरोधी भाषण देने के आरोपी जवारहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र शरजील इमाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने शनिवार को साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में कहा गया है कि शरजील ने 13 दिसंबर को जामिया में भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद 15 दिसंबर को नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में जमकर हिंसा हुई थी जिसमें सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया था।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मिले सबूतों से इस बात की पुष्टि होती है कि उसने देशविरोधी भाषण दिए और इससे हिंसा भड़की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हमने नहीं पढ़ी चार्जशीट
वहीं, शरजील इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने कहा कि हमने अभी पूरी चार्जशीट नहीं पढ़ी है, जो कि दिल्ली पुलिस ने 17 अप्रैल 2020 को दायर की थी। इसे पढ़ने के बाद ही हम आगे उचित कदम उठाएंगे।
गौरतलब है नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में चल रहे आंदोलनों के बीच शरजील इमाम का जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने का एक विवादित बयानों वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जनवरी के आखिर में शरजील को उसके पैतृक स्थान बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने शरजील के खिलाफ 25 जनवरी को मामला दर्ज किया था।
असम को देश से अलग करने की बात कही थी
16 जनवरी के एक ऑडियो क्लिप में इमाम को यह कहते हुए सुना गया कि असम को भारत के शेष हिस्से से काटना चाहिए और सबक सिखाना चाहिए क्योंकि वहां बंगाली हिंदुओं और मुस्लिम दोनों की हत्या की जा रही है या उन्हें निरोध केंद्रों में रखा जा रहा है। ऐसी खबर है कि उसने यह भी कहा था कि अगर वह पांच लाख लोगों को एकत्रित कर सकें, तो असम को भारत के शेष हिस्से से स्थायी रूप से अलग किया जा सकता है…अगर स्थायी रूप से नहीं तो कम से कम कुछ महीनों तक तो किया ही जा सकता है।

