धर्म हमारी शरण : आचार्य महाश्रमण
10-03-2020, मंगलवार, मणेराजुरी, सांगली, महाराष्ट्र। वर्तमान में महाराष्ट्र राज्य में सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति के उद्देश्यों के साथ यात्रा कर रहे अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज प्रातः तासगांव स्थित पद्मावती मंगल कार्यालय से विहार किया। इस दौरान गत दिवस कार्यक्रम में पधारे हुए लोकसभा सांसद श्री संजय पाटिल अहिंसा यात्रा से इतने प्रभावित हुए कि आज विहार में जैन ध्वज उठाकर कई किलोमीटर तक वे गुरुदेव के साथ चले एवं यात्रा में अपनी सहभागिता दी। आज भी पूज्यवर के मार्ग में अनेक अंगूर उत्पादन केंद्र दिखाई दे रहे थे। मानो इस क्षेत्र को अंगूरों की मिठास के साथ-साथ परम पावन आचार्य श्री की अमृतवाणी सुनने का भी सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। लगभग 10 किमी विहार कर ज्योतिचरण महाश्रमण मणेराजुरी गांव के महावीर पांडुरंगा साळुंखे हाई स्कूल में पधारे।
प्रवचन सभा में श्रद्धालुओं पर ज्ञान वर्षा करते हुए पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा हमारी इस दुनिया में शरण की की बात आती है। व्यक्ति अनेक बार बड़ों की शरण स्वीकार स्वीकार करता है। जैन धर्म में भी चार प्रकार के शरण कहे गए हैं–अरिहंत की शरण, सिद्धों की शरण, साधु की शरण और सारांश रूप में देखे तो केवली प्रज्ञप्त धर्म की शरण में जाना चाहिए। धर्म हमारा शरण स्थल है। हम धर्म के द्वारा संसार सागर को पार कर सकते हैं।
पूज्यवर ने आगे कहा कि यह जो संबंधी, पारिवारिकजन, मित्र, परिचित होते है कोई भी हमारे लिए शरण नहीं है। उनमें सामर्थ्य नहीं कि शरण बन सके। व्यक्ति खुद भी किसी का शरण नहीं बन सकता। क्योंकि जब कर्म भोगने पड़ते हैं तो कोई साथ नहीं देता। शरीर की वेदना कोई और बांट नहीं सकता। बड़े-बड़े राजा, चक्रवर्ती भी यहां नहीं बच सके। कोई उन्हें मौत से नहीं बचा सका। यह अशरणता है। ऐसे समय में धर्म ही है जिसके द्वारा हम ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं जहां ने जन्म है न मृत्यु है, न रोग है न शौक है, कोई कष्ट नहीं है। धर्म सर्व दुख मिटाने वाला तत्व है। व्यक्ति अपने जीवन में अधिक से अधिक धर्म करें यह काम्य है। इस अवसर पर मणेराजुरी गांव के सरपंच श्री सदाशिव कलढोने, विद्यालय व्यवस्थापक श्री प्रकाश मैत्रे ने शांतिदूत का अभिनंदन में अपने विचार रखें।
वही होली के पावन पर्व के अवसर गुरु दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रावक पहुँचे थे उसी कड़ी में नवी मुम्बई से विजय संचेती अपनी पत्नी मंजू संचेती और बेटे शशांक संचेती के साथ गुरुदेव की रास्ते की सेवा के साथ साथ दर्शन सेवा का लाभ लिया। विजय संचेती ने कहा कि होली के पावन अवसर पर गुरुदेव की एक झलक मात्र ही शरीर मे ऊर्जा भर देती हैं। गुरु देव के मुख से अमृत रूपी मंगल पाठ सुनने के बाद हर श्रावक अपने आप को ऊर्जावान अनुभव करता हैं। मैं अपने आपको शौभाग्यशाली मानता हूँ कि आज के दिन परिवार के साथ दर्शन सेवा का लाभ लेने का अवसर प्राप्त हुआ।


