विकास धाकड़/(मालाड़) मुंबई। शासन श्री साध्वीश्री विद्यावतीजी “द्वितीय’ आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में तेरापंथ भवन मालाड़ में तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन बहुत ही व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से हुआ। साध्वीश्री जी के महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मालाड तेरापंथ सभा के अध्यक्ष गणेशलालजी कोठारी ने स्वागत व्यक्तत्व दिया।
साध्वीश्री डा.रिद्धि यशाजी ने तेरापंथ के उद्भव एवं तत्कालीन परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आचार्य भिक्षु के पास ऐसी मानसिकता और दीर्घदर्शिता थी, जिसके आधार पर परिस्थितियों का सही मूल्यांकन कर अभिनिष्क्रमण किया। उनका अभिनिष्क्रमण किसी ब्याक्ति विशेष के विरोध में नहीं हुआ, अपितु आचार और विचार की शुद्धता के लिए हुआ। साध्वी श्री प्रेरणाश्रीजी एवं साध्वीश्री मृदुयशाजी ने गीत का संगान किया। शासनश्री साध्वीश्री जी ने विलक्षण पुरुष आचार्य भिक्षु के जीवन के विविध पहलुओं पर सारगर्भित उद्बोधन देतें हुए कहा आचार्य भिक्षु संकल्प के धनी थे। उनका फौलादी संकल्प विषम परिस्थितियों में भी शिथिल नहीं हुआ।
महावीर वाणी उनकी साधना का सबसे बड़ा आधार थी। आचार्य भिक्षु ने जीवन भी पवित्रता को धर्म का आधार माना । महामना भिक्षु ने साधना को संगठन के साथ जोड़कर उसे ऐसे मजबूत सांचे में ढाला कि हजारों वर्षों तक उसे कोई हिला नहीं सकता। शासनश्री ने आह्वान किया कि इस संगठन से जुडे व्यक्तियों को पवित्रता की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। कार्यशाला के मुख्य वक्ता सूरत के उपासक प्रवक्ता सुरेशजी बाफना ने तेरापंथ के मूलभूत सिद्धान्तों को जन भाषा में प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।
आचार्य भिक्षु साध्य साधन सिद्वान्त की प्रस्तुति में उन्होंने कहा साध्य शुद्ध है तो साधन भी शुद्ध होना चाहिए। अशुद्ध साधन से शुद्ध साध्य की प्राप्ति नहीं की जा सकती। साध्य यदि कर्म मुक्ति है,धर्माराधना है तो ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप ही साधन हो सकता है। धन से धर्म की आराधना नहीं हो सकती। सांसारिक कर्तव्य और अध्यात्म की भेद रेखा को सरल, सरस और सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया। मुम्बई सभा के मंत्री दिनेशजी सुत्तरिया, महासभा के प्रतिनिधि राजेन्द्र जी मुणोत,अर्हंम् फाउंडेशन के मंत्री दलपत जी बाबेल, महिला मंडल के अध्यक्ष उर्मिला जी भंडारी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल मालाड ने किया। मुख्य वक्ता का सम्मान तेरापंथ समाज के सभी संस्थाओं द्वारा किया गया। कांदिवली, भायंदर, गोरेगांव आदि क्षेत्रों की भी सराहनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री सुरेशजी धोका ने किया। अन्त में जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया ।

