भरत सोलंकी/जयपुर। देश के विभिन्न महानगरों-जैसे मुंबई, दिल्ली, पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु -में रहने वाले मारवाड़ के बड़ी संख्या में प्रवासी लोग नियमित रूप से अपने गांवों में आते-जाते रहते हैं। ट्रेनों की अच्छी सुविधा होने के बावजूद उन्हें अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में सबसे बड़ी परेशानी रेलवे स्टेशन से गांव तक की यात्रा में आती है। मारवाड़ क्षेत्र के कई रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी चालकों द्वारा मनमाना किराया मांगे जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। मजबूरी में यात्रियों को कई बार डबल रिटर्न किराया तक देना पड़ता है, जिससे यात्रा काफी महंगी पड़ जाती है।
ऐसी स्थिति में यदि ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं—जैसे ओला और उबेर—राजस्थान के छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच जाएं तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे रेलवे स्टेशन से गांव तक पहुंचना आसान होगा और किराये में पारदर्शिता भी आएगी। इतना ही नहीं, गांव पहुंचने के बाद आसपास के गांवों में आने-जाने के लिए भी लोगों को सुविधाजनक और सस्ती परिवहन व्यवस्था मिल सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों ने राजस्थान सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण सुझाव रखा है। उनका कहना है कि यदि राज्य में छोटे कस्बों और गांवों के आसपास लगभग 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर सीएनजी गैस पंप उपलब्ध कराए जाएं, तो टैक्सी सेवाओं का नेटवर्क तेजी से फैलाया जा सकता है। वर्तमान में कई इलाकों में सीएनजी उपलब्ध नहीं होने के कारण टैक्सी चालकों को पेट्रोल और डीजल पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिचालन लागत काफी बढ़ जाती है और किराया भी महंगा हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीएनजी नेटवर्क और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का विस्तार गांवों तक हो जाता है तो राजस्थान में टैक्सी उद्योग एक बड़े रोजगार क्षेत्र के रूप में उभर सकता है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। जिस तरह देश के बड़े शहरों में लोग दूर-दराज के गांवों से आकर टैक्सी चलाते हैं, उसी तरह अगर यह उद्योग गांवों में विकसित होता है तो स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सकेगा।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह पहल काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। राजस्थान पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख केंद्र रहा है। यदि गांवों तक सुगम परिवहन व्यवस्था विकसित होती है तो पर्यटक भी छोटे-छोटे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, परिवहन ढांचे में सुधार, सीएनजी सुविधाओं का विस्तार और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना राजस्थान को न केवल पर्यटन बल्कि टैक्सी उद्योग के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी प्रदेश बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीति और बुनियादी सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए नया अवसर साबित हो सकता है।
राजस्थान बन सकता है टैक्सी पर्यटन उद्योग का नया केंद्र, गांवों तक ओला-उबर पहुंचाने की मांग तेज

