नीरज राज,(बस्ती-उ.प्र.)। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मुसहा में 10वां आयुर्वेद दिवस पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बाल कृष्ण यादव ने बताया कि भारत सरकार के नए निर्देशानुसार अब आयुर्वेद दिवस हर साल 23 सितंबर को मनाया जाएगा, न कि धनतेरस के दिन। इसका कारण है कि धनतेरस की तारीख हर साल बदलती थी, जिससे आयुर्वेद दिवस को वैश्विक पहचान मिलने में बाधा आ रही थी।
डॉ. बाल कृष्ण यादव ने 23 सितंबर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस दिन यानी 23 सितंबर को दिन और रात की अवधि बराबर होती है, और आयुर्वेद का सिद्धांत भी इसी पर आधारित है कि शरीर में जब दोष,अग्नि, धातुएं सम मात्रा में होती है तो शरीर स्वस्थ्य रहता है और जब यहीं दोष, अग्नि, धातुएं विषम हो जाती है तब शरीर अस्वस्थ्य हो जाता है।
इस अवसर पर चिकित्सालय में भगवान धन्वंतरि की भव्य पूजा-अर्चना की गई, जिसमें सभी ने एकजुट होकर समाज के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। साथ ही, एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। शिविर में उपस्थित लोगों को औषधीय पौधों के गुणों और घरेलू नुस्खों से स्वस्थ रहने के सरल उपायों की जानकारी दी गई। आयुर्वेद के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्राथमिक विद्यालय, मुसहा में एक विशेष योग शिविर का भी आयोजन किया गया। इस शिविर में छात्रों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय मुसहा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 10वां आयुर्वेद दिवस

