मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को त्रिभाषा फॉर्मूले के कार्यान्वयन से संबंधित अपने दोनों सरकारी प्रस्तावों (16 अप्रैल और 17 जून, 2025) को रद्द करने का ऐलान किया। यह निर्णय हिंदी को प्राथमिक कक्षाओं में तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के प्रस्ताव के खिलाफ तीव्र विरोध के बाद लिया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि त्रिभाषा नीति पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा।
फडणवीस ने बताया कि इस नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए शिक्षाविद् और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति गठित की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही त्रिभाषा फॉर्मूले को लागू करने का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने हमेशा मराठी भाषा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में वैकल्पिक रखा गया था, और छात्रों को अन्य भारतीय भाषाओं को चुनने की स्वतंत्रता भी दी गई थी।”
इस साल अप्रैल में जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) में कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई, जिसमें विपक्षी दलों, मराठी साहित्यकारों और नागरिक संगठनों ने इसे हिंदी थोपने का प्रयास करार दिया। मराठी भाषा के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठनों ने इसे मराठी पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया।
17 जून को सरकार ने एक संशोधित जीआर जारी कर हिंदी को “आम तौर पर” तीसरी भाषा के रूप में लागू करने की बात कही, साथ ही यह प्रावधान जोड़ा कि यदि किसी कक्षा में 20 या अधिक छात्र किसी अन्य भारतीय भाषा को चुनना चाहें, तो वे हिंदी के बजाय उसे पढ़ सकते हैं। हालांकि, इस संशोधन को भी “हिंदी थोपने का परोक्ष प्रयास” बताकर विरोध जारी रहा।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर 5 जुलाई को संयुक्त विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। मराठी साहित्यकारों और संगठनों ने भी हस्ताक्षर अभियान, मेमे प्रतियोगिता और दस्तावेजों को जलाने जैसे विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई थी।
विपक्षी दलों, खासकर मनसे और शिवसेना (यूबीटी), के साथ-साथ सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के कुछ नेताओं, जैसे उपमुख्यमंत्री अजित पवार और एकनाथ शिंदे, के दबाव के बाद सरकार ने दोनों जीआर रद्द करने का फैसला किया। फडणवीस ने कहा, “हम मराठी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। त्रिभाषा नीति का उद्देश्य मराठी माध्यम के छात्रों को शैक्षणिक क्रेडिट में लाभ देना था, लेकिन हम इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों से चर्चा करेंगे।”
नई समिति विभिन्न राज्यों में त्रिभाषा नीति की स्थिति का अध्ययन करेगी और मराठी छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में किसी भी तरह का नुकसान न हो, यह सुनिश्चित करेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि वह जल्द ही लेखकों, भाषा विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं के साथ परामर्श शुरू करेंगे।
राज ठाकरे ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह मराठी जनता के दबाव की जीत है। हालांकि, सरकार हिंदी को लागू करने के लिए इतनी जिद क्यों कर रही थी, यह एक रहस्य बना हुआ है।” वहीं, उद्धव ठाकरे ने इसे “भाषाई आपातकाल” की समाप्ति करार दिया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला स्कूलों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है, जिसमें तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। महाराष्ट्र में मराठी और अंग्रेजी पहले से अनिवार्य हैं, और तीसरी भाषा के रूप में हिंदी या अन्य भारतीय भाषा को शामिल करने का प्रस्ताव था। हालांकि, तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने इस नीति का विरोध करते हुए दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) को अपनाया है।
राज-उद्धव ठाकरे की नजदीकियों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने त्रिभाषा फॉर्मूले पर निर्णय लिया वापस

