भायंदर (मुंबई)। शासनश्री साध्वी श्री विद्यावतीजी ‘द्वितीय’ ठाणा 5 के सात्रिध्य में पर्युषण पर्व का तीसरा दिन सामायिक दिवस के रुप में मनाया गया। तेरापंथ युवक परिषद ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। तत्यश्चात् अभिनय सामायिक प्रयोग में साध्वी प्रेरणाश्री जी ने ध्यान योग एंव साध्वी मृदुयशाजी ने जप का प्रयोग करवाया।
साध्वी प्रियंवदाजी ने कहा-पर्युषण पर्व आत्मलक्षी बनने का संदेश देता है। जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व पर्युषण है। संपूर्ण जैन समाज इस पर्व के प्रति श्रध्दानत है। इसका अंतिम दिवस संवत्सरी महापर्व के रुप में त्याग,तप एंव उपवास के साथ मनाया जाता है।
साध्वी विद्यावतीजी ने कहा -पर्युषण पर्व के अंतर्गत सैकड़ों भाई बहिनें लंबी-लंबी निराहार तपस्या भी करते है। स्वाध्याय एंव संयम के द्वारा आत्मा को भावित करके नई ऊर्जा संचारित करते है।
साध्वीश्री जी ने भगवान महावीर के सत्ताईस भवों में से पंद्रह भवों का मार्मिक विश्लेषण किया। उपस्थित जनमेदिनी ने भगवान महावीर के प्रति श्रध्दावनत होकर कृतज्ञ भाव समर्पित किया। साध्वी प्रेरणाश्रीजी ने सामायिक विषय पर विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन साध्वी प्रियंवदाजी एवं साध्वी रिद्धियशाजी ने किया।
पर्युषण के तीसरे दिन भायंदर में सामायिक दिवस का आयोजन
Highlights
- पर्युषण पर्व आत्मलक्षी बनने का पर्व है: साध्वीश्री

