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प्रज्ञा ठाकुर अकेली नहीं, राहुल, सोनिया और शशि थरूर पर भी है जमानती कैंडिडेट का ठप्पा

Last updated: April 26, 2019 2:10 pm
Surabhi Saloni
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11 Min Read
File Photo
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भोपाल लोकसभा सीट पर प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टिकट देने की वजह से बीजेपी की आलोचना हो रही है, क्योंकि वह मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी हैं और अभी जमानत पर चुनाव लड़ रही हैं। प्रज्ञा की इसलिए भी आलोचना हो रही है कि उन्होंने खराब तबीयत का हवाला देकर जमानत ली थी और आज वह चुनाव में खूब ऐक्टिव दिख रही हैं। वैसे जमानती उम्मीदवार का दाग सिर्फ प्रज्ञा या बीजेपी पर ही नहीं है। सियासत के इस हमाम में किसी भी पार्टी का दामन साफ नहीं है।
आइए जानते हैं 2019 के लोकसभा चुनाव में कौन से नेता जमानत पर रहते हुए चुनाव लड़ रहे हैं।
प्रज्ञा सिंह ठाकुर – मालेगांव ब्लास्ट केस
पार्टी: बीजेपी
लोकसभा सीट: भोपाल (मध्य प्रदेश)
विपक्ष में: दिग्विजय सिंह (कांग्रेस)
मामला: 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास एक ब्लास्ट हुआ। इस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई और करीब 80 घायल हो गए। धमाका एक बाइक में विस्फोटक छिपाकर किया गया था। महाराष्ट्र ATS ने कोर्ट में बताया कि धमाके में इस्तेमाल बाइक प्रज्ञा ठाकुर की है। 2011 में यह केस महाराष्ट्र ATS से NIA को सौंप दिया गया। 13 मई 2016 को NIA ने सबूतों के अभाव में प्रज्ञा समेत पांच आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप वापस ले लिए। 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाकुर को सशर्त जमानत दी। जमानत के आदेश के मुताबिक प्रज्ञा ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही थीं और चल भी नहीं सकती थीं।
चुनाव: जमानत पर चल रहीं प्रज्ञा ठाकुर ने 17 अप्रैल 2019 को आधिकारिक तौर पर बीजेपी जॉइन की और इसी दिन पार्टी ने उन्हें भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना दिया। इस सीट पर कांग्रेस की तरफ से एमपी के पूर्व सीएम मंत्री दिग्विजय सिंह लड़ रहे हैं, जिन्होंने अतीत में प्रज्ञा ठाकुर को लेकर खूब बयानबाजी की थी। उम्मीदवारी फाइनल होने के बाद प्रज्ञा ने मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए तब के ATS चीफ हेमंत करकरे के बारे में कहा, ‘उसने मुझे टॉर्चर किया था। मैंने उसे सर्वनाश हो जाने का श्राप दिया था’। इसकी वजह से बीजेपी की खूब किरकिरी हुई थी। प्रज्ञा ‘हिंदू आतंकवाद’ के मुद्दे पर दिग्विजय को घेर रही हैं, वहीं दिग्विजय कहते हैं कि उनकी डिक्शनरी में ‘हिंदुत्व’ शब्द है ही नहीं।सोनिया गांधी – नैशनल हेरल्ड केस
पार्टी: कांग्रेस
लोकसभा सीट: रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
विपक्ष में: दिनेश प्रताप सिंह (बीजेपी)
मामला: 1938 में पं. जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेरल्ड अखबार शुरू किया था, जिसका मालिकाना हक असोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के पास था। AJL अन्य अखबार भी छापता था। 2008 में AJL ने अखबार न छापने का फैसला किया। तब तक AJL पर 90 करोड़ रुपए कर्ज भी चढ़ चुका था।
इसके बाद एंट्री होती है 5 लाख रुपये की पूंजी से बनी यंग इंडियन कंपनी की, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी हैं। शेष 24% हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास हैं।
कांग्रेस से ‘यंग इंडिया’ को ₹90 करोड़ का कर्ज दिया गया, जिससे ‘यंग इंडिया’ ने AJL के 99% शेयर खरीद लिए। बाद में कांग्रेस ने ‘यंग इंडिया’ का ₹90 करोड़ का कर्ज भी माफ कर दिया। नतीजा यह हुआ कि ‘यंग इंडियन’ को लगभग फ्री में ‘AJL’ का स्वामित्व मिल गया। स्वामी का तर्क है कि राजनीतिक पार्टियों के फंड व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
चुनाव: नैशनल हेरल्ड इकलौता केस है, जिसमें गांधी परिवार के किसी शख्स का नाम सीधे-सीधे शामिल है। यह केस सुब्रमण्यन स्वामी 2012 में कोर्ट में ले गए थे। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 19 दिसंबर 2015 को सोनिया-राहुल को जमानत दे दी। इसके बाद से पीएम मोदी तमाम मौकों पर सोनिया-राहुल के जमानती होने का ज़िक्र कर चुके हैं। जब प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर सवाल उठाए गए, तब भी बीजेपी ने नैशनल हेरल्ड का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। रायबरेली में उनके खिलाफ बीजेपी ने दिनेश प्रताप सिंह को उतारा था, जो पहले कांग्रेस में ही थे और MLC रह चुके हैं।
राहुल गांधी – नैशनल हेरल्ड केस
पार्टी: कांग्रेस
लोकसभा सीट: अमेठी (उत्तर प्रदेश) और वायनाड (केरल)
विपक्षी: अमेठी में स्मृति इरानी (बीजेपी) और वायनाड में तुषार वेल्लापल्ली (NDA)
चुनाव: कांग्रेस अध्यक्षी के दिनों में सोनिया गांधी ने नैशनल हेरल्ड को लेकर खूब हमले झेले। अब यही स्थिति राहुल गांधी की है। 2019 में राहुल दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ही सीटों पर बीजेपी ने नैशनल हेरल्ड को लेकर राहुल पर खूब निशाना साधा। राहुल के वायनाड से लड़ने को भी बीजेपी अपनी जीत के तौर पर प्रदर्शित कर रही है। अमेठी में उनका मुकाबला स्मृति इरानी से है, जो 2014 में हार के बावजूद अमेठी आती-जाती रहीं। वहीं वायनाड में NDA ने तुषार वेल्लापल्ली को कैंडिडेट बनाया है, जिन्होंने दोबारा वोटिंग की मांग की थी।
4. शशि थरूर – सुनंदा पुष्कर केस
पार्टी: कांग्रेस
लोकसभा सीट: तिरुवनंतपुरम (केरल)
विपक्षी: कुम्‍मनम राजशेखरन (बीजेपी) और सी दिवाकरन (सीपीआई)
मामला: अगस्त 2010 में थरूर ने व्यवसायी सुनंदा पुष्कर से शादी की थी। 17 जनवरी 2014 की रात सुनंदा दिल्ली के 5 स्टार होटल लीला पैलेस में मृत पाई गईं। पहले इसे स्वाभाविक मौत माना गया, लेकिन एम्स की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि सुनंदा की मौत ज़हर से हुई थी। पुलिस ने जांच शुरू की, तो थरूर से भी पूछताछ की गई। जुलाई 2018 में दिल्ली पुलिस ने थरूर की न्यायिक हिरासत की मांग की, जबकि थरूर ने अग्रिम जमानत की मांग की। पुलिस द्वारा चार्जशीट दायर होने का हवाला देते हुए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 5 जुलाई 2018 को थरूर को जमानत दे दी। हालांकि, थरूर के विदेश जाने पर कोर्ट ने रोक लगाई थी।
चुनाव: 2009 में थरूर तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर 99,998 वोटों से चुनाव जीते थे। 2014 में मोदी लहर के बीच थरूर महज़ 15,470 वोटों से चुनाव जीते थे। इस बार तिरुवनंतपुरम में त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी ने मिजोरम के पूर्व गवर्नर कुम्मनम राजशेखर को उतारा है, जबकि LDF ने CPI के ट्रेड यूनियन नेता रहे सी. दिवाकरन पर दांव लगाया है। हालांकि, पिछले 10 साल के थरूर के प्रदर्शन को देखते हुए लग रहा है कि उन्हें इस सीट पर हराना विरोधियों के लिए मुश्किल होगा।
5. कन्हैया कुमार – देशद्रोह केस
पार्टी: CPI
लोकसभा सीट: बेगूसराय (बिहार)
विपक्षी: गिरिराज सिंह (बीजेपी) और तनवीर हसन (आरजेडी)
मामला: अफजल गुरु की फांसी को ‘न्यायिक हत्या’ मानने वाले JNU के कुछ छात्रों ने उसकी बरसी पर 9 फरवरी 2016 को कैंपस में एक कार्यक्रम रखा। ABVP की आपत्ति और विवाद की आशंका के चलते यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इवेंट रद्द कर दिया गया। हालांकि, इवेंट की जगह नारेबाजी हुई और टीवी पर विडियो चले कि JNU में छात्रों ने भारत के टुकड़े-टुकड़े होने के नारे लगाए। 11 फरवरी 2016 को ABVP की शिकायत पर कन्हैया और उनके साथियों पर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ। 12 फरवरी 2016 को कन्हैया गिरफ्तार हुए और 26 अगस्त 2016 को उन्हें जमानत मिली। करीब तीन साल बाद 2019 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने इस केस में चार्जशीट तैयार की। 8 अप्रैल 2019 को कोर्ट ने दिल्ली सरकार को 23 जुलाई तक फैसला लेने को कहा कि कन्हैया पर मुकदमा चलेगा या नहीं। हालांकि, दिल्ली सरकार ने अभी तक इसपर कोई फैसला नहीं लिया है जिसकी वजह से मामला लटका हुआ है।
चुनाव: 32 साल के कन्हैया पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। CPI ने उन्हें उनके ही गृहनगर बेगूसराय से से कैंडिडेट बनाया है। कन्हैया की दावेदारी से पहले बेगूसराय सीट पर CPI और RJD में गठबंधन की चर्चा थी, लेकिन यह डील फाइनल नहीं हुई। अब कन्हैया के सामने RJD के तनवीर हसन और बीजेपी के गिरिराज सिंह मैदान में हैं।
6. पप्पू यादव – पुलिस से बदसलूकी, आचार संहिता उल्लंघन
पार्टी: जन अधिकार पार्टी
लोकसभा सीट: मधेपुरा (बिहार)
विपक्षी: शरद यादव (आरजेडी) और दिनेश चंद्र यादव (जेडीयू)
मामला: पप्पू यादव का क्रिमिनल रिकॉर्ड बरसों पीछे जाता है। 2019 चुनाव के संदर्भ में बात करें, तो पप्पू को मार्च 2019 में दो मामलों में जमानत मिली। पहले 19 मार्च 2019 को पुलिस से बदसलूकी के 25 साल पुराने मामले में जमानत मिली। इस केस में पप्पू ने प्रयागराज कोर्ट में सरेंडर किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया और चार घंटे बाद उन्हें जमानत मिल गई। फिर 26 मार्च 2019 को पप्पू को 2015 में दरभंगा में आचार संहिता के उल्लंघन मामले में जमानत मिली। यहां भी पप्पू ने पहले सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई।
चुनाव: 2014 में आरजेडी से जीतने वाले पप्पू यादव इस बार अपनी बनाई ‘जन अधिकार पार्टी’ से चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 में उन्होंने मधेपुरा में जेडीयू के शरद यादव को हराया था। जेडीयू से निष्कासित होने के बाद शरद इस बार आरजेडी के टिकट पर महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। पप्पू यादव पहले खुद महागठबंधन के उम्मीदवार बनना चाहते थे, लेकिन तेजस्वी और राहुल, दोनों ने ही उन्हें भाव नहीं दिया। मधेपुरा में जेडीयू ने दिनेश चंद्र यादव को उतारा है, जो NDA की तरफ से उम्मीदवार हैं।

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