ज्ञान प्रकाश देने वाला है- मुनि श्री जिनेश कुमारजी
मुंबई। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा 10 दिवसीय धर्मबोध कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की संपन्नता पर समापन समारोह का आयोजन किया गया।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा जीवन की पवित्रता का आधार है। धर्म शोधन की प्रक्रिया है। धर्म जीवन का अर्थ है। धर्म जीवन का व्रत व रथ है। धर्म जीवन का प्राण है। धर्म से ही व्यक्ति परमात्मा की आराधना कर सकता है। धर्म बोधक कार्यशाला ज्ञान वृद्धि का उपक्रम है। धर्म बोधक कार्यशाला के जरिए जैन धर्म की प्राथमिक जानकारी नमस्कार महामंत्र, वंदना, सामूहिक प्रतिक्रमण, लोगस्स, गोचरी, मुनिचर्या, 9 तत्व, 10 प्रत्याख्यान आदि विषयों के माध्यम से दी गई। जीवन निर्माण में ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ज्ञान से सम्यक दर्शन व चारित्र स्थिर रहता है। ज्ञान प्रकाश देने वाला है। ज्ञान के विकास से चेतना की पवित्रता प्रकट होती है। अंत सभी को ज्ञान चेतना वर्ष में अधिक से अधिक ज्ञानार्जन करना चाहिए। धर्मबोध कार्यशाला में जो आपने सीखा है उसे सहेज कर रखेंगे तभी हमारे और आपके परिश्रम की सार्थकता हो सकेगी। मनीष तलेसरा ने कार्यशाला के लिए जागरूकता से परिश्रम किया इस लिए वह साधुवाद का पात्र है।
कार्यक्रम का शुभारंभ हितेश बदामिया के मंगलाचरण से हुआ इस अवसर पर तेयुप अध्यक्ष हितेश सिंघवी, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष्या संगीता जी बाफना, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष नरेशजी राठौड़, पुष्पा जी श्रीश्रीमाल, रमेश जी तलेसरा ने कार्यशाला के प्रति अपने विचार रखे कार्यक्रम का आभार एवं संचालन संयोजक मनीष तलेसरा ने किया। लगभग 70 श्रावक श्राविकाओं ने कार्यशाला में भाग लिया।अंत मे कार्यशाला में भाग लेने वालों की परीक्षा आयोजित हुई। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।

