जगने का नाम है दीक्षा- मुनिश्री जिनेश कुमार जी
पालघर। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में दीक्षार्थी खुश बाबेल का अभिनंदन समारोह का आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा पालघर द्वारा किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा जब चमड़े की आंख खुलती है तब उसे उठना कहते हैं। जब बुद्धि की आंख खुलती है उसे समझना कहते हैं और जब हृदय की आंख खुलती है तो उसे जगना कहते है। जगने का नाम है दीक्षा। दीक्षा का अर्थ है प्रमाद से अप्रमाद ओर प्रस्थान, अहम से अर्हम की ओर प्रस्थान और असंयम से संयम की ओर प्रस्थान। वासना से उपासना की ओर प्रस्थान है। दीक्षा अदम्य आत्मबल का जीता जागता उदाहरण है। दीक्षार्थी खुश बाबेल आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन चरणों में 20 अक्टूबर को दीक्षित होने जा रहा है। खुश! तुम गुरु चरणों में शिक्षित होकर हमेशा गुरु इंगित की आराधना में सजग रहना। सदैव ज्ञान, दर्शन, चरित्र, तप की आराधना में उत्साही बने रहना। बाबेल परिवार व कुल का नाम रोशन करना। मैं तुम्हारे संयम जीवन के प्रति अनंत शुभकामनाएं देता हूं मंगलकामना करता हूं कि वैराग्य तुम्हारा विश्वास बने, स्वाध्याय तुम्हारा श्वाश बने, समता तुम्हारी सुवास बने और गुरु आज्ञा तुम्हारे जीवन का प्रकाश बने।
इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने सुमधुर अनुमोदना गीत प्रस्तुत किया। दीक्षार्थी खुश बाबेल ने गुरुजनों माता-पिता परिजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए तेरापंथ में दीक्षित होना अपना सौभाग्य बतलाया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष नरेश जी राठौड़, तेयुप अध्यक्ष हितेश सिंघवी, महिला मंडल अध्यक्ष संगीता बाफना, दीक्षार्थी की माता वसन्ता बाबेल, चेन्नई सभा के मंत्री प्रवीण बाबेल, दीक्षार्थी के पिता सुनील बाबेल, मनोर सभा अध्यक्ष भेरूलाल खिमेसरा, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष देवीलाल जी सिंघवी आदी ने दीक्षार्थी के अभिनंदन में अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंद जी ने किया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा द्वारा दीक्षार्थी का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर पालघर, मनोर, सफाला आदि क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।
पालघर में दीक्षार्थी अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन

