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पाकिस्तान में लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के 1000 मामले सामने आए

Last updated: April 16, 2019 7:31 am
Surabhi Saloni
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2 Min Read
प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस्लामाबाद:पाकिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन ने देश में हिन्दू एवं ईसाई लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और शादियों पर सोमवार को चिंता जाहिर की और कहा कि पिछले साल अकेले सिंध प्रांत में ऐसे तकरीबन 1000 मामले सामने आए हैं। अपनी सालाना रिपोर्ट में ‘पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने कहा कि सरकार ने ऐसी जबरन शादियों को रोकने के लिए अतीत में बहुत थोड़ी कोशिशें की हैं। उसने सांसदों से इस चलन को खत्म करने के लिए प्रभावी कानून बनाने को भी कहा।

आयोग ने 335 पन्नों की ‘2018 में मानवाधिकार की स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि 2018 में सिर्फ सिंध प्रांत में ही हिन्दू एवं ईसाई लड़कियों से संबंधित अनुमानित एक हजार मामले सामने आए। जिन शहरों में बार-बार ऐसे मामले हुए हैं उनमें, उमरकोट, थरपारकर, मीरपुरखास, बदीन, कराची, टंडो अल्लाहयार, कश्मोर और घोटकी शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण और जबर्दस्ती शादी का कोई प्रमाणिक आंकड़ा मौजूद नहीं है। उसमें बताया गया है कि ‘सिंध बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2013 को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया और जबरन शादियों पर सरकार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पुलिस की मिली-भगत नहीं रही तो भी अधिकतर मामलों में उसका रवैया असंवेदनशील और बेरूखी भरा रहा। रिपोर्ट में कहा कि 2018 में पाकिस्तान में अपनी आस्था के मुताबिक जिदंगी गुजारने पर अल्पसंख्यकों ने उत्पीड़न का सामना किया, उन्हें गिरफ्तार किया गया। यहां तक की कई मामले में उनकी मौत भी हुई।

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट आने से करीब एक हफ्ते पहले इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने घोषित किया है कि रवीना (13) और रीना (15) को हिन्दू से जबर्दस्ती मुसलमान नहीं बनाया गया है और उन्हें उनके पतियों के साथ रहने की इजाजत दे दी। रसूखदार व्यक्तियों ने होली की पूर्व संध्या पर इन दोनों नाबालिग हिन्दू लड़कियों का सिंध प्रांत के घोटकी जिले से कथित रूप से अपहरण कर लिया था।

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