मुंबई: कर्ज के बोझ तले दबी आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी की ऑडिटर फर्म रही डेलॉयट और केपीएमजी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय इन ऑडिट फर्म को खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर सकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कॉरपोरेट मंत्रालय के अधीन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) इन दोनों ऑडिट फर्मों पर 5 साल का बैन नहीं लगा सकता है। साथ ही कोर्ट ने इन दोनों फर्मों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया।
केंद्र सरकार ने की थी बैन लगाने की मांग
साल 2018 में आईएलएंडएफएस में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं। तब इन दोनों ऑडिट फर्मों पर आईएलएंडएफएस और इसकी सहायक कंपनियों के बेड लोन को छुपाने का आरोप लगा था। यह खुलासा होने के बाद डेलॉयट और केपीएमजी इस कंपनी के ऑडिट कार्य से हट गई थीं। इस बीच कॉरपोरेट मंत्रालय ने आईएलएंडएफएस और इस समूह की कंपनियों, ऑडिटर्स और अन्य के खिलाफ जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टीगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को सौंप दी थी। बाद में यह मामला एनसीएलटी में पहुंच गया, जहां केंद्र सरकार ने अपील दाखिल कर इन दोनों फर्मों पर पांच साल का प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
कॉरपोरेट मंत्रालय को अपील के लिए 8 सप्ताह का समय
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए कॉरपोरेट मंत्रालय को 8 सप्ताह का समय दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने कंपनीज एक्ट के सेक्शन 140(5) की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए कहा कि जो ऑडिटर्स इस्तीफा दे चुके हैं, उन पर यह लागू नहीं होगा। इसके अलावा हाईकोर्ट ने एसएफआईओ की ओर से स्पेशल कोर्ट में दायर मुकदमे या आपराधिक शिकायत को भी खारिज कर दिया।
डेलॉयट ने सेक्शन 140(5) की संवैधानिकता को दी थी चुनौती
डेलॉयट एंड हैसकिन्स और सेल एलएलपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कंपनीज एक्ट के सेक्शन 140(5) की संवैधानिकता और एनसीएलटी में दाखिल की गई केंद्र सरकार की अपील को चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने आईएलएंडएफएस के पूर्व ऑडिटर्स पर पांच साल का बैन लगाने की अपील की थी। वहीं केपीएमजी इंडिया की सहयोगी बीएसआर ने सेक्शन 140(5) की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा था कि जो व्यक्ति अपने पद से इस्तीफा दे चुका है, उस पर सरकार प्रतिबंध कैसे लगा सकती है।

