सुरभि सलोनी डेस्क/नई दिल्ली। मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके केंद्र सरकार से सवाल किया है कि पूरे दुनिया में जब कच्चे तेल की अप्रत्याशित रूप से घटी हैं, ऐसे में हमारे देश में आज भी पेट्रोल 69 रुपए तथा डीजल 62 रुपए प्रति लीटर क्यों है। राहुल ने कहा है कि इस विपदा के समय जो भी रियायत जनता को मिले वह अच्छा है।
दुनिया में कच्चे तेल की क़ीमतें अप्रत्याशित आँकड़ो पे आ गिरी हैं, फिर भी हमारे देश में पेट्रोल ₹69, डीज़ल ₹62 प्रति लीटर क्यों? इस विपदा में जो दाम घटे, सो अच्छा। कब सुनेगी ये सरकार? pic.twitter.com/DUSIiVZbka
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 21, 2020
उल्लेखनीय है कि वायरस महामारी के कारण मांग में भारी गिरावट से अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) ने सोमवार को अब तक के इतिहास में अपना सबसे बुरा दिन देखा। डब्ल्यूटीआई का वायदा भाव सोमवार को -$37.63 प्रति बैरल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार की शुरुआत 18.27 डॉलर प्रति बैरल से हुई और घटते-घटते पहले एक डॉलर के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई और मार्केट क्लोज होते-होते यह निगेटिव में पहुंच गई। सोचने वाली बात यह है कि कच्चे तेल का भाव अमेरिका में एक कप कॉफी से भी सस्ता हो गया है, क्योंकि वहां स्टारबक्स में एक कप कॉफी 3-4 डॉलर में मिलती है।
इस बीच कांग्रेस ने प्रेस कान्फ्रेंस करके कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में अप्रत्याशित गिरावट से सरकार ने लाखों रुपए का मुनाफा अर्जित किया है, इसलिए कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न संकट से जूझ रहे गरीबों में उसे यह लाभ बांटना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन से पूरी दुनिया में तेल की मांग घटी है जिसके कारण इसके दामों में अप्रत्याशित गिरावट आयी है। तेल उत्पादन रोका नहीं जा सकता है, इसलिए तेल उत्पादक देशों ने तेल बेचने के लिए ऑफर भी दिए हैं। भारत तेल आयात करने वाला दुनिया में दूसरे सबसे बड़ा देश है और हमारे पास भंडारण की भी असाधरण क्षमता है फिर भी भारत ने तेल को गिरे हुए दामों के बीच इसका आयात नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश इस गिरावट का फायदा उठाने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि उनके पास तेल भंडारण क्षमता सीमित है लेकिन भारत के पास तेल भंडारण की जबरदस्त क्षमता है। तेल में अभूतपूर्व गिरावट से हम लाभ कमा सकते हैं लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और उसने तेल आयात से इनकार किया है।
खास बात यह है कि तेल कीमतों में इस गिरावट के मद्देनजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह तेल कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट का इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रीय सामरिक भंडार को फिर से भरने के लिए करेंगे। ‘‘हम भंडार में 7.5 करोड़ बैरल भरना चाहते हैं।’’
इस मामले में भारत सरकार द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जबकि इसे लेकर आमजन भी में काफी चर्चा है। लोगों का मानना है कि देश में संकट के समय तेल कीमतों में कमी की जानी चाहिए, क्योंकि देश का हर नागरिक इस समय मुश्किलों से गुजर रहा है, ऐसे में तेल कीमतों में यदि ठीक-ठाक कमी हो जाती है तो काफी राहत मिल सकती है।

