पंकज श्रीवास्तव/पटना। कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन की वजह से देश भर में जगह-जगह लोग फंसे हैं। प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों और छात्रों को वापस लाने के लिए अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों अगल-अलग रवैया है। यूपी के मुख्यमंत्री ने अपने लोगों को लाने के लिए प्रयास किया है वही बिहार के मुख्यमंत्री लगातार इसके विरोध में रहें हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का तर्क रहा है, अगर किसी को यहाँ लाते हैं तो लॉकडाउन का मतलब ही नहीं रह जाएगा। इधर उनके सहयोगी दल (भाजपा) के मंत्री अनिल सिंह ने अपने बेटी को कोटा (राजस्थान) से लाकर मुख्यमंत्री को विरोधियों को सामने खड़ा कर दिया है। बताते चलें लॉकडाउन के बीच बिहार के हिसुआ विधानसभा से बीजेपी के विधायक अनिल सिंह ने अपने बेटी को कोटा से सड़क मार्ग से वापस लाया है। इसके लिए बकायदा उन्होंने आदेश भी लिया था। अब लपेटे में आये विधायक का कहना है कि मैं पहले पिता हूँ फिर विधायक। इसलिए मैंने पिता और विधायक का धर्म और कर्तव्य निभाया है।
इस मामले में जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्होंने कोरोना को लेकर की गई बंदी का उल्लंघन नहीं किया तो विधायक ने कहा कि मैं जिला प्रशासन की अनुमति और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही अपनी बेटी को वहाँ से लाया हूँ। विधायक ने कहा कि केवल सरकार की जिम्मेवारी पर अपने बच्चों को छोड़ने की जरूरत नहीं है मैं एक पिता हूँ और मैंने पिता की जो जिम्मेदारी होती है उसे निभाया है इसके साथ ही अनिल सिंह ने कहा कि हर देशवासी का भी अधिकार है। बताते चलें कल ही शनिवार को भी नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि कोटा में फंसे छात्रों को बुलाने की जो मांग की जा रही है पूरी तरह से गलत है। अगर ऐसा होगा तो फिर लॉकडाउन का क्या मतलब? इस प्रकरण के बाद बिहार के राजनीति में उबाल आ गया है। प्रशांत किशोर ने ट्वीटर पर वाहन पास दिखाते हुए नीतीश कुमार पर हमला बोला है. पीके ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कोटा में फँसे बिहार के सैकड़ों बच्चों की मदद की अपील को @NitishKumar ने यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि ऐसा करना #lockdown की मर्यादा के ख़िलाफ़ होगा। अब उन्हीं की सरकार ने BJP के एक MLA को कोटा से अपने बेटे को लाने के लिए विशेष अनुमति दी है। नीतीश जी अब आपकी मर्यादा क्या कहती है?
नीतीश योगी का विरोध करते रहे बिहार के भाजपा विधायक बेटी को लेकर आ गए घर, अब उठ रहे सवाल

