काठमांडू:नेपाली संसद के उच्च सदन ने रविवार (14 जून) को देश के नए राजनीतिक नक्शे को अद्यतन (अपडेट) करने के संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया। इन नक्शे में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन भारतीय क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे एक दिन पहले ही निचले सदन ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
नेपाल के सत्ताधारी और विपक्षी राजनीतिक दलों ने शनिवार (13 जून) को नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिये संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया। इसके तहत भारत के उत्तराखंड में स्थित लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाली क्षेत्र के तौर पर दर्शाया गया है। भारत ने इस कदम का सख्त विरोध करते हुए इसे स्वीकार करने योग्य नहीं बताया था।
शनिवार (13 जून) को नेपाल के निचले सदन में मौजूद सभी 258 सांसदों ने संशोधन विधेयक के पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव के खिलाफ एक भी मत नहीं पड़ा। अब विधेयक को नेशनल असेंबली में फिर इसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास नेशनल असेंबली में दो तिहाई बहुमत है।
समाचार पत्र काठमांडू पोस्ट की एक खबर के मुताबिक नेशनल असेंबली सचिवालय के सचिव राजेंद्र फुयाल ने रविवार को सदन की पहली बैठक में विधेयक को पेश किया। अखबार के मुताबिक, रविवार को बाद में नेशनल असेंबली की दूसरी बैठक के दौरान विधि मंत्री शिवमाया तुम्बाहाम्फे ने इस विधेयक पर विचार के लिए प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया कि चर्चा के बाद विधेयक पर विचार करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
नेशनल असेंबली ने सांसदों को विधेयक के प्रावधानों में संशोधन पेश करने के लिए 72 घंटे का वक्त दिया है। फुयाद को उद्धृत करते हुए अखबार ने कहा, “हम विधेयक को अगले चार दिन में पारित करने के लिए आवश्यक तैयारियां कर रहे हैं।” औपचारिक तौर पर मंगलवार (16 जून) को नेपाल के उच्च सदन में इस मामले पर वोटिंग तय है। नेशनल असेंबली से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास दस्तखत के लिए जाएगा। उनके दस्तखत के बाद यह संविधान में शामिल कर लिया जाएगा और हर सरकारी दस्तावेज में फिर इसी नक्शे का इस्तेमाल होगा।
इस बीच हिमालयन टाइम्स की खबर के मुताबिक मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह कूटनीतिक प्रयास तेज करे जिससे यह सुनिश्चित हो कि देश के राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शे के अद्यतन के बाद कालापानी इलाके में देश का अधिकार हो।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शनिवार को अपने बयान में कहा था कि हमने नेपाल द्वारा नये मानचित्र में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्र को शामिल करने के संविधान संशोधन विधेयक वहां के हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव में पारित होते देखा है। हमने पहले ही इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि दावों के तहत कृत्रिम रूप से विस्तार साक्ष्य और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह मान्य नहीं है।
प्रवक्ता ने कहा, ”यह लंबित सीमा मुद्दों का बातचीत के जरिए समाधान निकालने की हमारी वर्तमान समझ का भी उल्लंघन है।” कुछ दिन पहले भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा था कि उत्तराखंड के कालापानी, धारचूला और लिपुलेख को शामिल करने के मुद्दे को लेकर नेपाल सरकार के समक्ष अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है।
सड़क निर्माण शुरू होने पर तनाव हुआ
भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है।
नेपाल ने पिछले महीने जारी किया था देश का नया नक्शा
नेपाल ने पिछले महीने देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों पर अपना दावा बताया था। भारत यह कहता रहा है कि यह तीन इलाके उसके हैं। काठमांडू द्वारा नया नक्शा जारी करने पर भारत ने नेपाल से कड़े शब्दों में कहा था कि वह क्षेत्रीय दावों को “कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर” पेश करने का प्रयास न करे।

