नई दिल्ली: गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर अमेरिका में बने दो मिलिट्री ग्रेड लॉन्चिंग गियर मिले हैं। करीब 11 हजार किलो वजनी ये दोनों उपकरण खाली हो चुके कंटेनरों में रखे हुए थे। अधिकारियों ने 20 दिसंबर को खाली कंटेनरों की जांच के दौरान इन्हें बरामद किया। इनका इस्तेमाल विमानवाहक पोत से लड़ाकू विमान को उड़ान भरने के दौरान होता है। अधिकारियों ने यह सैन्य उपकरणों की तस्करी का मामला होने का शक जताया है।
सैन्य सूत्रों ने बताया कि दुनिया में केवल दो कंपनियां ही इस तरह के उपकरण बनाती हैं। अमेरिका में स्थित बोइंग और यूरोप की एयरबस कंपनी में ही इन्हें बनाया जाता है। मुंद्रा में बरामद दोनों उपकरण अमेरिका में बने हुए हैं।
8 नवंबर को न्यूयॉर्क से भेजे गए थे दोनों उपकरण
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- दोनों लॉन्चिंग गियर न्यूयॉर्क बंदरगाह से 8 नवंबर से भेजे गए थे। अमेरिका की डीएचएल ग्लोबल फॉरवर्डिंग कंपनी ने इन्हें बुक किया था। इन्हें रॉयल सऊदी लैंड फोर्सेस के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। शिपमेंट पर डिलीवरी के लिए पते के तौर पर लिखा गया था- प्रिंस सुल्तान रोड, एचडब्ल्यूवाई 156 जीजान सऊदी अरब। ऐसे में 10790.90 किलो भारी ये उपकरण भारत कैसे पहुंचे, इसकी जांच जरूरी है।
उपकरण भारत कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी नहीं
इन उपकरणों को ‘हापाग-लॉयड अक्तीनेगेलशाफ्ट’ कंपनी का ‘क्योटो एक्सप्रेस’ नाम का जहाज लेकर आ रहा था, लेकिन जेद्दा बंदरगाह पर इसे उतारने की कोई जानकारी नहीं मिली। इस जहाज ने भारत पहुंचने से पहले पाकिस्तान के कराची सहित 5 बंदरगाहों पर लंगर डाला था। जब जहाज मुंद्रा पहुंचा, तो अधिकारियों ने इन्हें ‘खाली’ का लेबल लगे कंटेनरों में रखा पाया। अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच में यह सैन्य उपकरणों की तस्करी का मामला लग रहा है, लेकिन विस्तार से जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
डीआरडीओ के शिपमेंट भी गायब हो चुके
रक्षा सूत्रों ने कहा कि पहले भी कुछ ऐसे मामले सामने आए थे, जब रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अमेरिका से स्पेयर पार्ट्स या मशीनों का ऑर्डर दिया था, लेकिन शिपमेंट रास्ते में ही गायब हो गए और इनके बारे में कभी पता नहीं चला।

