मुंबई। भगवान महाविष्णु के शेषशायी स्वरूप की भव्य महामूर्ति के दर्शन देशभर के श्रद्धालुओं को कराने के उद्देश्य से श्री नारायण भक्ति पंथ (SNBP) द्वारा 12 वर्षों की अखिल भारतीय ‘श्री नारायण रथयात्रा’ आयोजित की जाएगी। इस महायात्रा का शुभारंभ 21 और 22 जनवरी 2027 को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स से किया जाएगा। यह जानकारी पंथ के संस्थापक सद्गुरु श्री लोकेशानंदजी महाराज ने बुधवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में दी। पत्रकार परिषद में सद्गुरु श्री लोकेशानंदजी महाराज ने रथयात्रा की संकल्पना, उद्देश्य और आगामी नियोजन की जानकारी दी। इस अवसर पर पंथ के समन्वयक राकेश शंकर शेट्टी सहित पदाधिकारी, कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
आयोजकों के अनुसार, ‘एक महामूर्ति, एक महायात्रा और एक सनातन चेतना’ की संकल्पना के माध्यम से देशभर में आध्यात्मिक जागृति पैदा करने का प्रयास किया जाएगा। अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को भगवान नारायण के दर्शन उपलब्ध कराना, भक्ति एवं संस्कारों का प्रसार करना, सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा नशामुक्त और संस्कारक्षम समाज का संदेश पहुंचाना रथयात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
मुंबई से महाराष्ट्र और फिर देशभर में यात्रा
21 और 22 जनवरी 2027 को महालक्ष्मी रेसकोर्स से रथयात्रा के शुभारंभ के बाद मुंबई के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों से इसे ले जाया जाएगा। प्रथम चरण में महालक्ष्मी, सिद्धिविनायक, माटुंगा, अंधेरी पूर्व, मुलुंड, ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई क्षेत्रों को शामिल किए जाने की जानकारी आयोजकों ने दी। इसके बाद रथयात्रा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से होते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएगी। आगामी 12 वर्षों तक देशभर में भ्रमण कर अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक भगवान महाविष्णु की महामूर्ति के दर्शन और आध्यात्मिक संदेश पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया गया है।
15 फीट लंबी पंचधातु की महामूर्ति आकर्षण का केंद्र
रथयात्रा का प्रमुख आकर्षण भगवान महाविष्णु की शेषशायी स्वरूप वाली लगभग 15 फीट लंबी पंचधातु की महामूर्ति होगी। पंथ के अनुसार, इस महामूर्ति की लंबाई करीब 15 फीट, शेषनाग के फण की ऊंचाई लगभग 5 फीट और वजन करीब 9 टन है। मूर्ति निर्माण में सोना, चांदी, तांबा, जिंक सहित अन्य धातुओं का उपयोग किए जाने की जानकारी दी गई। आयोजकों के मुताबिक, करीब 30 कुशल कारीगरों ने 12 महीने की अवधि में इस महामूर्ति का निर्माण किया है और इसके निर्माण पर लगभग 130 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ये आंकड़े आयोजकों द्वारा पत्रकार परिषद में दी गई जानकारी पर आधारित हैं।
शहादा में ‘श्री नारायणपुरम् धाम’
नंदुरबार जिले के शहादा में श्री नारायण भक्ति पंथ का प्रमुख तीर्थस्थल ‘श्री नारायणपुरम् धाम’ स्थित होने की जानकारी भी पत्रकार परिषद में दी गई। पंथ के अनुसार, यहां शेषशायी नारायण भगवान का विग्रह प्रतिष्ठापित है। भक्ति, संस्कार, आध्यात्मिक जागृति और नशामुक्ति का संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने के लिए पंथ द्वारा सामाजिक एवं आध्यात्मिक उपक्रम चलाए जाते हैं।
12 वर्षों की महायात्रा का संकल्प
सद्गुरु श्री लोकेशानंदजी महाराज ने बताया कि मुंबई से शुरू होने वाली यह रथयात्रा अगले 12 वर्षों तक देश के विभिन्न क्षेत्रों में जाएगी। भगवान महाविष्णु की महामूर्ति के दर्शन अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को कराने के साथ ही भक्ति, संस्कार, सनातन मूल्य, आध्यात्मिक जागृति और नशामुक्त समाज का संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचाना इस महायात्रा का व्यापक उद्देश्य है।
पंथ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सद्गुरु श्री लोकेशानंदजी महाराज का जन्म 21 फरवरी 1980 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ। 15 वर्ष की आयु में उन्होंने स्वामी श्री अच्युतानंदजी महाराज के सान्निध्य में साधना प्रारंभ की। लगभग 12 वर्षों की तपश्चर्या के बाद वर्ष 2016 में श्री नारायण भक्ति पंथ की स्थापना तथा शहादा में श्री नारायणपुरम् तीर्थ की स्थापना किए जाने की जानकारी पंथ की ओर से दी गई।

