मुंबई। गंभीर हृदय रोग से पीड़ित एक 44 साल के पुरुष मरीज़ को बहुत ज़्यादा सांस लेने में दिक्कत, पैरों में सूजन और रोज़ के काम न कर पाने की दिक्कत थी। मुंबई में पहली ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (TEER) प्रोसीजर के बाद उनकी हालत में काफ़ी सुधार हुआ है। यह मिनिमली इनवेसिव कार्डियक थेरेपी उन मरीज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प प्रदान करती है जिनके लिए ओपन-हार्ट सर्जरी बहुत ज़्यादा रिस्क वाली है और यह प्रक्रिया भारत में माइट्रल वाल्व बीमारी के इलाज के तरीकों को बदल रही है।
मरीज़ को गंभीर माइट्रल रिगर्जिटेशन (MR) का पता चला था, यह एक ऐसी कंडिशन है जिसमें हृदय का माइट्रल वाल्व ठीक से बंद नहीं होता, जिससे रक्त ऊपरी चैंबर में पीछे की ओर लीक होने लगता है। उसके लक्षण इतने बढ़ गए थे कि कम दूरी तक चलना या सीढ़ियाँ चढ़ना जैसे रोज़ के काम भी बहुत मुश्किल हो गए थे। ओपन-हार्ट सर्जरी या हार्ट ट्रांसप्लांट जैसे पारंपरिक इलाज उनके लिए सही नहीं थे क्योंकि उनके दिल का काम करना मुश्किल था और उससे संबंधित जोखिमों भी थे। इसलिए, टीईईआर -एक एडवांस्ड कैथेटर-बेस्ड थेरेपी-को सबसे सुरक्षित और असरदार ऑप्शन बताया गया।
एडवांस्ड कार्डियक केयर में एक मील का पत्थर टीईईआर मिनिमली इनवेसिव तरीके से वाल्व रिपेयर के लिए एक नॉन-सर्जिकल सॉल्यूशन प्रदान करता है, जिससे प्रोसीजर से जुड़े रिस्क काफी कम हो जाते हैं और रिकवरी का समय भी कम हो जाता है। यह सफल प्रोसीजर मुंबई के दादर स्थित एचवीएस सिम्बायोसिस अस्पताल के चीफ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंकुर फतरपेकर और अन्य प्रतिभागियों डॉ. मेघव शाह, स्ट्रक्चरल इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और डॉ. गौरीश शिंदे, एचवीएस सिम्बायोसिस अस्पताल, दादर, मुंबई द्वारा की गई, जो शहर में हाई-एंड कार्डियक केयर की उपलब्धता में एक बड़ी प्रगति को दर्शाती है। प्रोसिजर के बाद, मरीज़ में काफ़ी सुधार देखा गया। उनकी सांस फूलने की समस्या कम हुई, उनके चलने-फिरने में सुधार हुआ, और अब वह रोज़ के काम फिर से कर पा रहे है-यह सब टीईईआर थेरेपी के असरदार होने और मरीज़ के लिए अच्छा होने को दिखाता है।
अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. अंकुर फतरपेकर ने कहा: “टीईईआर थेरेपी उन मरीज़ों के लिए एक ज़रूरी ऑप्शन है जो कोमोरबिडिटी या एडवांस्ड हार्ट फेलियर की वजह से ओपन-हार्ट सर्जरी नहीं करवा सकते। यदि गंभीर माइट्रल रेगर्जिटेशन का अगर इलाज न किया जाए, तो यह मृत्यु दर को काफी बढ़ा देता है। टीईईआर हमें काफी कम रिस्क के साथ एक सुरक्षित, असरदार और मिनिमली इनवेसिव सॉल्यूशन देने में मदद करता है। मुंबई में इस थेरेपी को शुरू करने से हम उन हाई-रिस्क मरीज़ों का इलाज कर पाएँगे जिनके पास पहले बहुत कम ऑप्शन थे।” मुंबई में टीईईआर की सफल शुरुआत देश के मेडटेक सेक्टर में मेरिल की परिवर्तनकारी भूमिका को दिखाती है। लगातार इनोवेशन, एडवांस्ड इंटरवेंशनल कार्डियोवैस्कुलर सॉल्यूशन के डेवलपमेंट और रिसर्च-ड्रिवन इंजीनियरिंग के लिए मज़बूत कमिटमेंट के ज़रिए, मेरिल वर्ल्ड-क्लास, सुलभ और मरीज़ों पर केंद्रित कार्डियक थेरेपी प्रदान करने की भारत की क्षमता को बढ़ा रहा है। लेटेस्ट कार्डियक इंटरवेंशन तक पहुंच विस्तार करके, मेरिल ग्लोबल मेडटेक मैप पर भारत की स्थिति मजबूत कर रहा है और यह सुनिश्चित करने में मदद कर रहा है कि एडवांस्ड इलाज पूरे देश में मरीजों तक पहुंचे।
मुंबई का पहला ‘मेड इन इंडिया’ टीईईआर प्रोसीजर डॉ. अंकुर फतरपेकर द्वारा किया गया
Highlights
- मेरिल ने भारत के बढ़ते मेडटेक परिदृश्य में एक लीडर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की

