नई दिल्ली:पीएनबी घोटाले में आरोपी मेहुल चौकसी ने सोमवार को ईडी और सीबीआई के दावों को नकार दिया। उसने कहा कि एजेंसियां कह रही हैं कि मैं जांच में शामिल होना नहीं चाहता, यह गलत है। मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है, पर मैं जांच में शामिल होने के लिए तैयार हूं। एजेंसियां चाहें तो मुझसे एंटीगुआ आकर पूछताछ कर सकती हैं। पीएनबी घोटाला उजागर होने से पहले ही मेहुल चौकसी ने भारत छोड़ दिया था। इसके बाद उसने एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी।
मेहुल ने कहा- मैं जांच का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूं मगर मेरी सेहत खराब है। मैं सफर करने में असमर्थ हूं। जैसे ही सफर करने के लिए फिट हो जाऊंगा, मैं भारत लौट आऊंगा।
लगातार मेडिकल सुपरविजन की जरूरत: चौकसी
चौकसी ने कहा- मैंने 15 फरवरी 2018 को विदेश में सर्जरी करवाई थी। इसके बाद मुझे सफर करने से मना कर दिया गया था। मुझे लगातार मेडिकल सुपरविजन की जरूरत पड़ती है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि चौकसी को कोरोनरी अर्टरी डिसीज, डायबिटीज मेलीटस, हायपरटेंशन, वेट लॉस जैसी बीमारियां हैं।
जनवरी 2018 में चौकसी को मिली एंटीगुआ की नागरिकता
चौकसी ने कोर्ट में लाइसेंसधारी फिजिशियन द्वारा सत्यापित की गई रिपोर्ट पेश की है। डॉ. मार्कोस ने अपनी रिपोर्ट में चौकसी को एंटीगुआ से बाहर सफर न करने और लगातार मेडिकल परीक्षण करवाते रहने के निर्देश दिए हैं। पीएनबी मामले में चौकसी के अलावा उसका भतीजा नीरव मोदी भी आरोपी है। दोनों एक साल पहले देश छोड़कर भाग गए थे। चौकसी को 15 जनवरी 2018 को एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता मिल गई थी।
ईडी ने अदालत से चौकसी को भगोड़ा घोषित करने की अपील की थी
इससे पहले ईडी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर मेहुल चौकसी की दो याचिकाएं खारिज करने की अपील की थी। चौकसी ने एक याचिका भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया के खिलाफ दायर की थी। दूसरी याचिका में कहा था कि ईडी जिन लोगों के बयानों के आधार पर उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करवाना चाहता है उन लोगों से बहस की इजाजत दी जाए। ईडी ने हलफनामे में कहा था कि चौकसी एंटीगुआ की नागरिकता ले चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि वह जांच में सहयोग के लिए भारत नहीं आना चाहता। एजेंसी ने कहा था कि पेश नहीं होने पर अदालत उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर संपत्ति जब्त कर सकती है।

