By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: मैं लौट कर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं…
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
Articles

मैं लौट कर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं…

Last updated: August 18, 2018 10:49 am
Surabhi Saloni
Share
6 Min Read
SHARE

सौरभ जैन (अंकित)
राजनीति के परम हंस, भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय जननेता के रूप में सदैव अमर रहेंगे। वर्ष 2004 के आम चुनाव की हार के बाद सत्ता की राजनीति से संन्यास ले लेने वाले अटलजी ने अपने लोक जीवन में जो मिसाल कायम की, वह दुर्लभ है। सक्रिय राजनीति के दौर में अटलजी का कभी कोई व्यक्तिगत विरोधी नहीं रहा। विपरीत राजनीतिक विचारधारा के लोग भी उनका सदा सच्चे हृदय से सम्मान करते रहे। एक ज़माने में राजनीतिक अछूत सी समझी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी को देश के बहुत सारे दलों के बीच सिरमौर बनाने का श्रेय उन्हीं के खाते में दर्ज है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू उनकी प्रतिभा को बहुत पहले की जान गये थे। अटलजी की उदारवादी सोच ही उनकी आत्मिक शक्ति रही। वे भारत की आशाओं के प्रतीक बने। भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल अटलजी सब को साथ लेकर विकास पथ पर देश को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे। धुर राजनीतिक विरोधियों से उनकी अंतरंगता, सौजन्यता, सम्मान भावना ने अटलजी को राजनीति के संत के तौर पर प्रतिष्ठापित किया। हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…! अटलजी ने न कभी चुनौतियों से हार मानी, न कभी किसी से रार ठानी। उदारमना अटलजी की तेजस्विता ने राजनीति के जिस युग का शंखनाद किया, उसकी गूंज सारी दुनिया में सुनाई दी। अटलजी का नाता देश से रहा, किसी भी विवाद को उन्होंने अपने निकट आजीवन नहीं फटकने दिया। एक जमाने में इंदिरा जी को देवी का अवतार कहने वाले अटलजी ने गुजरात दंगों के संदर्भ में नरेन्द्र मोदी को राजधर्म निभाने की नसीहत भी दी। अर्थात, यहां अपना-पराया कोई नहीं। अटल जी के लिए कर्म ही प्रधान रहा। उन्होंने कर्म को ही धर्म माना। उनकी सर्व स्वीकारता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि साम्प्रदायिक ताकत के नाम पर बदनामी का शिकार बनायी जाने वाली भाजपा के शिखर नेता का लखनऊ की जनता ने कभी साथ नहीं छोड़ा। यह तो उस क्षेत्र की बात है, जहां का प्रतिनिधित्व वे करते रहे। लेकिन देश का नेतृत्व करने की क्षमता भी उन्हें उत्तरप्रदेश ने दी। वजह स्पष्ट है कि अटल जी राजनीति में होते हुए भी राजनीति से ऊपर थे। जैसे सरोवर में कीचड़ से ऊपर रहने वाला कमल। याद आता है वह प्रसंग, जब अटलजी को लोकसभा पहुंचने से रोकने के लिए ग्वालियर में उनके खिलाफ माधवराव सिंधिया को चुनाव मैदान में उतार दिया गया था। अटलजी वह चुनाव ग्वालियर में हार गए लेकिन लखनऊ ने उन्हें दिल्ली भेजा। वह दौर भी याद आता है जब लोकसभा में दो यानी अटल-आडवाणी ही थे लेकिन अटलजी और लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा को दो से सौ पर पहुंचाया। गठबंधन राजनीति का दौर शुरु हुआ तो अटलजी ने भाजपा का जनसंघ के जमाने से देखा जा रहा सपना साकार कर दिया। पहले तेरह दिन, फिर तेरह माह और फिर बहुमत वाली गठबंधन सरकार के मुखिया बनकर उन्होंने भारत को नयी दिशा दी। विश्व में भारत की विश्वसनीयता बढ़ी। पड़ोसी दुश्मन से भी रार नहीं ठानी। दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन वक्त आने पर कड़ा सबक भी सिखा दिया। भारत को वैश्विक बिरादरी में आज जो सम्मान प्राप्त है, उसके पीछे अटलजी के कूटनीतिक चातुर्य का अद्वितीय योगदान है। अटलजी की कूटनीतिक क्षमता का अहसास तो अपने प्रधानमंत्रित्वकाल में राजीव गांधी को भी हो गया था इसिलिए उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए अटलजी का सहयोग लिया था। अटलजी ने सुदीर्घ राजनीतिक जीवन में कभी भी क्षण मात्र की कटुता अथवा नैराश्य को पनाह नहीं दी। वे भारत के ऐसे इकलौते राजनेता रहे हैं जिन्हें विपरीत राजनीतिक विचारधारा के नेताओं ने भी अपनापन दिया। अटलजी सर्वदा इसके अधिकारी थे। उन्होंने राजनीति और समाजनीति को अलग-अलग संज्ञाएं दे रखी थीं। किन्तु अभीष्ट यही था कि राजनीति अपनी जगह और समाज अपनी जगह। राजनीति को समाजपरक होना चाहिए। न तो समाज आधारित राजनीति हो और न ही राजनीति पर आधारित सामाजिकता। यही वजह है कि अटल बिहारी वाजपेयी का कोई राजनीतिक विरोधी नहीं हुआ। वे देश के सर्वमान्य जननेता बने और राजनीति से संन्यास लेने के बाद भी सर्वप्रिय नेता। शुचिता की राजनीति का युग अब उनके साथ ही चला गया। राजनीति का अटल युग और अटल जी की राजनीति की विरासत कोई संभाल सके, ऐसा एक भी राजनेता भारतवर्ष में नजर नहीं आता। राजनीति महत्वाकांक्षाओं का वह जंगल है जहां शेर अपना शिकार और मृग अपनी कस्तूरी की तलाश में सारे मूल्यों को खो देता है किन्तु अटल जी ने आजीवन मूल्यों की राजनीति की और राजनीति को मूल्यांकित किया। अब स्मृति शेष है, चिर स्मृति शेष है। अटलजी की एक कविता के माध्यम से ही उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। किन्तु सच्ची राजनीतिक श्रद्धांजलि तो यह होगी कि राजनीति में जिस परम्परा के संवाहक अटलजी थे, दलगत राजनीति से परे देशहित में वह ध्वजा उठाने वाले राजनीति में अवतरित हों। यदि ऐसा हुआ तो भारतीय राजनीति का शुद्धिकरण हो जाएगा।
मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं
जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article तमिल, तेलुगू और हिन्दी में बनेगी जयललिता की जीवनी पर फिल्म
Next Article शराबखोरी के विरुद्ध संगठित मातृशक्ति की जीत

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

अनुराग कश्यप और बॉबी देओल का बड़ा धमाका! इस दिन रिलीज होगी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘बंदर’
entertainment
April 27, 2026
नेशनल अवॉर्ड विनर सुधांशु सरिया बॉलीवुड में दो नए डायरेक्टर्स को लॉन्च करेंगे!
entertainment
April 27, 2026
तुमने दिल दिया नहीं’   कृष और किशोर मंडल  का ब्रांड न्यू  सॉंग  आउट
entertainment
April 27, 2026
तेरापंथाधिशास्ता महाश्रमण के 17वें पट्टोत्सव में उमड़ा आस्था का ज्वार
social
April 26, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?