मुंबई: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के नाम से पहचाने जाने वाले विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की विरासत को भी आगे बढ़ाया। इसी विरासत को गणेशोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी से जोड़ने की एक अनूठी पहल विलेपार्ले पूर्व के रोहित तोस्कर और उनके परिवार ने की है।
गणेशोत्सव के माध्यम से केवल उत्सव मनाने के बजाय, लोकमान्य तिलक के विचारों, विद्यालय की यादों और उस दौर के संस्कारों से नई पीढ़ी को परिचित कराने का प्रयास इस संकल्पना के जरिए किया गया है।
पुरानी यादों, संस्कारों और आज की नई पीढ़ी को एक सूत्र में जोड़ने का विचार इस संकल्पना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। उत्सव के अवसर पर अपने इतिहास और परंपराओं से जुड़े रिश्ते को नए सिरे से संजोना, यही इसका मुख्य उद्देश्य है।
इस संकल्पना को साकार करने के लिए सजावट की जिम्मेदारी गणेश जोशी, मयुरी ठोंबरे, चंचल ठोंबरे, सुचित्रा ठोंबरे, देवांग हिंगू और सिद्धेश मटकर ने संभाली है। उनकी रचनात्मक सजावट के माध्यम से लोकमान्य तिलक के विचारों और पुराने संस्कारों की विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
आज के दौर में नए विचारों और नई सोच के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी विरासत, संस्कारों और पुरानी यादों को संजोकर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी विचार के साथ रोहित तोस्कर और उनके परिवार ने गणेशोत्सव को एक अलग सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ देने का प्रयास किया है।

