मुंबई:कोरोना वायरस संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने प्रवासी मजदूर कामगारों को उनके घर पहुंचाने कि लिए रेलवे से मदद मांगी है। दरअसल महाराष्ट्र सरकार इस बात से चिंतिंत है कि कहीं तीन मई के बाद अप्रवासी मजदूर और कामगार फिर से सड़क पर न आ जाए। क्योंकि जब दूसरी बार लॉकडाउन बढ़ा था तो बांद्रा स्टेशन पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था।
हजारों की संख्या में प्रवासी मजूदर स्टेशन पर पहुंच गए थे। भीड़ का तितर बितर करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करनी पड़ी थी। इस घटना बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से कहा गया कि कुछ लोगों ने ट्रेन जाने की अफवाह फैला दी थी, जिसकी वजह से लोग अपने घर जाने के लिए स्टेशन पर आ गए हैं। खासकर मुंबई में स्थिति ठीक नहीं है। मरीजों की संख्या में हर दिन बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
दूसरी केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में भेजने के लिए विशेष रेलगाड़ियां चलाने संबंधी महाराष्ट्र सरकार की मांग को बुधवार को खारीज कर दिया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विशेष रेलगाड़ियां चलाने की मांग केन्द्र से की थी। केन्द्रीय राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्री गडकरी ने एक समाचार चैनल से कहा, ‘मैं उनकी (प्रवासी श्रमिकों) भावनाओं और परेशानियों को समझता हूं लेकिन हम बिना किसी सावधानी बरतें उन्हें अपने मूल स्थानों पर जाने नहीं दे सकते हैं। इन्हें (रेलगाड़ियों को चलाकर) निजामुद्दीन जैसी एक और स्थिति पैदा नहीं की जा सकती है।
उन्होंने कहा, ”मैं बल्कि कहूंगा कि राज्य (महाराष्ट्र) को अगले कुछ हफ्तों के लिए इन प्रवासी श्रमिकों का ध्यान रखना चाहिए। उन लोगों को यह समझना चाहिए कि कोरोना वायरस बीमारी के फैलने के कारण उनका उनके पैतृक गांवों में स्वागत नहीं किया जा सकता है। गडकरी ने कहा कि तीन मई के बाद लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद रेलगाड़ी सेवाओं को अत्यंत सावधानी बरतते हुए शुरू किया जाएगा और लोगों को लंबे समय तक सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा।

