राघवेंद्र प्रताप सिंह, कैसरगंज, बहराइच, (उ.प्र.)। बहराइच जिले के कैसरगंज तहसील क्षेत्र में भेड़ियों के आतंक ने एक बार फिर ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। बुधवार को मंझारा तौकली गांव में भेड़ियों के हमले की दो दिल दहलाने वाली घटनाओं ने इलाके में दहशत फैला दी। एक घटना में तीन साल की मासूम बच्ची की जान चली गई, जबकि दूसरी घटना में एक चार वर्षीय बालक बाल-बाल बच गया।मंझारा तौकली की ग्राम सभा बाबा बगला गांव में दोपहर करीब 3 बजे एक आदमखोर भेड़िया बाबूलाल की तीन साल की बेटी सोनी पर झपटा।
उस समय बच्ची के पास उसकी मां झाड़ू-पोंछा कर रही थी। अचानक भेड़िया बच्ची को उठाकर भागने लगा। मां ने शोर मचाया और जानवर के पीछे दौड़ पड़ी। कड़ी मशक्कत के बाद भेड़िया बच्ची को छोड़कर भागा, लेकिन तब तक बच्ची का बायां हाथ पूरी तरह कट चुका था। ग्रामीणों ने तुरंत बच्ची को फखरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएससी) पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। इसी दिन दोपहर में मंझारा तौकली के दयालपुरवा में गेंदाराम का चार वर्षीय बेटा नल से पानी लेने जा रहा था। तभी एक भेड़िया उस पर हमला करने की फिराक में था। गेंदाराम की नजर भेड़िए पर पड़ी और उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इकट्ठा किया। शोर सुनकर बीडीसी सदस्य आलोक यादव अपनी टीम के साथ लाठी-डंडों के साथ मौके पर पहुंचे और भेड़िए का पीछा किया। भेड़िया कुछ दूरी पर जाकर गन्ने के खेत में जा छिपा।
इस घटना में बच्चा सुरक्षित बच गया, लेकिन ग्रामीणों में भय व्याप्त है। कैसरगंज क्षेत्र में भेड़ियों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद भेड़िए दिनदहाड़े गांवों में घुस रहे हैं और मासूम बच्चों को निशाना बना रहे हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में भेड़ियों की मौजूदगी बढ़ गई है, जिसके कारण लोग अपने बच्चों को घर से बाहर निकालने में डर रहे हैं। इन घटनाओं ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भेड़ियों को पकड़ने या जंगल में वापस भेजने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। कई बार शिकायत के बावजूद वन विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही मिलता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भेड़ियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। कैसरगंज क्षेत्र में भेड़ियों का आतंक अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। प्रशासन और वन विभाग को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके और गांवों में दहशत का माहौल खत्म हो।
कैसरगंज में भेड़िया का आतंक, मासूम बच्ची की मौत, गांव में दहशत

