सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: जालना में हर्षोल्लास से मनाया आचार्य महाप्रज्ञ शताब्दी का द्वितीय चरण
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

जालना में हर्षोल्लास से मनाया आचार्य महाप्रज्ञ शताब्दी का द्वितीय चरण

Last updated: February 1, 2020 12:27 am
Surabhi Saloni
Share
3 Min Read
SHARE

जालना। तेरापंथ धर्मसंघ के दशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी प्रज्ञा के अवतार थे। उनकी प्रज्ञा के जागरण में महती भूमिका थी उनकी गुरु के प्रति अनन्य समर्पण की भावना। वे निष्काम भाव से सदैव गुरु के प्रति समर्पित रहे। फलत: एक के बाद एक उपलब्धियों से उनका जीवन अभिमंत्रित होता रहा। गुरुदेव तुलसी के निर्देश से उन्होंने जिस ध्यान पध्दति का अनुसंधान किया उसे प्रेक्षा ध्यान के माध्यम से पहचान प्राप्त हुई।
ध्यान का अभ्यास हर किसी के लिए सहज नहीं है। पर ध्यान कि उपसंपदा के सूत्र का जो अभ्यास करता है उसके लिए वह सहज हो जाता है ।आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने उपसंपदा के पांच सूत्र दिए ।भावक्रिया ,प्रतिक्रियाविरति, मैत्री, मिताहार मितभाषण ये ऐसे बिन्दू हैं जो ध्यान के योग्य भूमि का निर्माण करते हैं। समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी निर्वाणश्रीजी ने यह उद्गार व्यक्त किए।
प्रखरवक्ता साध्वी योगक्षेमप्रभा जी ने कहा मैं अपना सौभाग्य मानती हूं कि मुझे आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के चरणों में बैठकर कुछ ज्ञान, कुछ ध्यान करने का अवसर मिला। आचार्य महाप्रज्ञ जी ऐसे सरस्वती पुत्र थे जिनके वाणी और कर्म से अहर्निश करूणा का निर्झर बहता रहता था। प्रेक्षाध्यान उस निर्झर की एक अमल धारा है। उसका अभ्यास करने के लिए हम सर्वप्रथमअपने चित्त को श्वास पर केंद्रित करें ।श्वास को साधते — साधते हम अपने मन को साधने में सफल हो जाते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपासिका स्वरूपा पीपाड़ा एवं उर्मिला पीपाड़ा द्वारा समुच्चारित महाप्रज्ञ अष्टकम से हुआ। साध्वीलावण्यप्रभाजी ,साध्वी कुंदनयशाजी, साध्वी मुदितप्रभाजी, साध्वी श्रेयसप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी ने समवेत रूप से अभ्यर्थना गीत समर्पित किया ।प्रेक्षा फाउंडेशन के सदस्य पवन जी सेठिया ने अपने भावों की प्रासंगिक अभिव्यक्ति देते हुए प्रणति समर्पित की ।कुछ समय के लिए “ओम ह्रीं श्रीं महाप्रज्ञ गुरुवे नमः इस मंत्र पद का सस्वर संगान पाठ किया गया ।साध्वी श्री ने ‘अर्हं ‘ के न्यास का प्रयोग करवाया। यह प्रयोग सभी श्रोताओं को अत्यंत रुचिकर लगा ।विगय के प्रत्याख्यान के साथ तप का प्रयोग भी किया। अनेक भाई– बहिनों ने प्रतिदिन प्रेक्षा ध्यान का अभ्यास करने का संकल्प व्यक्त किया ।ज्ञातव्य है कि यह समारोह प्रेक्षाफाउंडेशन के तत्त्वावधान में परिसंपन्न हुआ।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article फ़िल्म रिव्यूः जवानी जानेमन ( साढ़े तीन स्टार ) ***1/5
Next Article आज का राशिफल – 1.2.2020

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

दक्षिण मुम्बई का श्रावक समाज पहुँचा मुंबई में विराजित चारित्रात्माओ के खमत खामना करने
social
September 20, 2026
शून्य से शिखर तक 4.0 में उद्योगपति गणपतराज चौधरी ने साझा की संघर्ष, व्यवसाय और सेवा की प्रेरक यात्रा
social
September 20, 2026
भोजपुरीः वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स से शिल्पी राज और सपना चौहान का नया लोकगीत ‘ऐ ननदो तोहरा भईया बिना’ रिलीज़
entertainment
September 20, 2026
The Revolutionaries के लिए रोहित सराफ ने 15 महीने की कड़ी ट्रेनिंग की
entertainment
September 20, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?