मुंबई। मायानगरी के रूप में दुनिया भर में विख्यात मुंबई रविवार की सुबह धर्मनगरी के रूप में खिल रही थी। श्री मुंबई जैन संघ संगठन के तत्वावधान में आयोजित सामूहिक जैन रथयात्रा में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने जैन धर्म, आस्था और सामाजिक एकता का भव्य दृश्य रचा। करीब तीन किलोमीटर लंबी इस रथयात्रा में 1100 जैन संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि 200 से अधिक जैन संघों की धार्मिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और सामाजिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। संगठन के ट्रस्टी वीरेंद्रभाई शाह, घेवरचंद बोहरा और भंवरलाल कोठारी के नेतृत्व में तथा आशीष शाह, राकेश शाह, नितिन वोरा, मुकेश जैन और कल्पेश हेक्कड़ के प्रयासों से रथयात्रा का आयोजन किया गया। महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने रथयात्रा का शुभारंभ किया। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा में शामिल हुए। इस अवसर पर मुंबई के जैन संघों की ओर से समाजसेवी चुन्नीलाल चंदन और जिनशासन एकता प्रेमी बाबूलाल भंसाली को ‘शासनरत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
हजारों धर्मध्वजाओं, रंगोलियों और भक्ति गीतों से सजे मार्ग पर श्रद्धालु धर्म और एकता के जयघोष करते हुए आगे बढ़े। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने गुरु भगवंतों और पुण्यात्माओं का स्वागत किया। रथयात्रा में 400 से अधिक साधु-साध्वी भगवंतों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा मिली। विभिन्न झांकियों के माध्यम से विश्व शांति, सामाजिक एकता, स्वच्छता और संस्कारों का संदेश दिया गया। रथयात्रा में एक नन्हा बालक भी आकर्षण का केंद्र रहा। छोटी मिनी मोटरसाइकिल पर सवार यह बालक सबसे आगे चल रहा था और उसके पीछे श्रद्धालुओं का काफिला आगे बढ़ रहा था। आधुनिकता और संस्कार का यह दृश्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण बना। रथयात्रा के माध्यम से जैन समाज की एकता, संगठन और धर्म के प्रति आस्था का संदेश सामने आया। श्री मुंबई जैन संघ संगठन ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी जैन संघों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
श्री मुंबई जैन संघ संगठन के ट्रस्टी भंवरलाल कोठारी ने कहा कि मुंबई की इस विशाल रथयात्रा का उद्देश्य केवल एक दिन का धार्मिक आयोजन करना नहीं था। इसके पीछे समस्त मानव समाज को एक सूत्र में बांधने, जैन संघों के बीच संगठन व एकता को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का व्यापक भाव था। कोठारी ने कहा कि मायानगरी की चमक-दमक के बीच धर्म की लौ को प्रज्वलित रखने और मानवीय मूल्यों को जीवन का आधार बनाने का संदेश इस यात्रा ने दिया। श्री मुंबई जैन संघ संगठन के आशीषभाई शाह ने कहा कि जीवन में सुख, शांति और सबके मंगल की कामना के साथ निकली यह सामूहिक रथयात्रा मुंबई के जैन समाज की एकजुटता का विराट प्रदर्शन बनी। सैकड़ों संतों, हजारों श्रद्धालुओं, बच्चों, युवाओं और महिलाओं की सहभागिता ने इसे महज रथयात्रा नहीं रहने दिया, बल्कि यह धर्म, संस्कृति, संगठन और मानवता के मूल्यों का चलता-फिरता संदेश बन गई।
रथयात्रा के दौरान मुंबई की भागती जिंदगी के बीच कुछ घंटों के लिए सड़कें जैसे ठहर गई थीं। वाहनों के शोर की जगह धर्म की जय-जयकार थी। आधुनिकता के बीच परंपरा थी और मायानगरी के बीच एक बार फिर यह एहसास था कि मुंबई केवल अर्थ की नगरी नहीं, आस्था और धर्म की भी नगरी है।
जैन रथयात्रा में 50 हजार से अधिक धर्मप्रेमियों का उमड़ा सैलाब

