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Reading: हर काम में बेस्ट देने की सोच से मिलेगी हर कदम पर तरक्की
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lifestyle

हर काम में बेस्ट देने की सोच से मिलेगी हर कदम पर तरक्की

Last updated: February 7, 2019 4:10 pm
Surabhi Saloni
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4 Min Read
Image Courtesy: Google
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आज की बात हमारी प्रोफेशनल सक्सेस के लिए बेहद जरूरी है। हम अक्सर कोई काम करते हुए बोरियत या ऊबन महसूस करने लगते हैं। काम करना जरूरी है, इसलिए उसे जैसे-तैसे बस खत्म कर देते हैं। मगर ऐसा करते हुए हम यह नहीं समझ पाते हैं कि हम भले बेमन से काम कर रहे हैं, लेकिन समय तो पूरा ही दे रहे हैं।
दूसरी बात बेमन से काम करके हम अपने प्रोफेशन के साथ भी तो नाइंसाफी कर रहे हैं। हम जो काम करने के लिए सौंपा गया है, वो हमारी विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए सौंपा गया है। इस लिए काम से जी चुराना मतलब अपनी काबीलियत को कम करना है। इससे बेहतर जब काम का जी न करे, तो उसे करने से इनकार कर दें। यही बात हमारी आज की कहानी में भी बताई जा रही है।

एक कारीगर बहुत सालों से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ मकान बनाने का काम करता था। लेकिन अब वह बहुत वृद्ध हो चला था और उससे मकान बनाने का मेहनत भरा काम नहीं हो पाता था इसलिए उसने अपने काम से हमेशा के लिए अलग होने का मन बनाया ताकि अपनी बची हुई थोड़ी बहुत जिंदगी वह अपने परिवार वालों के साथ व्यतीत कर सके। वह अपने मालिक के पास गया और अलग होने के फैसले के बारे में बताया। उसकी बात सुनकर मालिक को मन ही मन दुख हुआ क्योंकि वह का ईमानदार और अनुभवी कारीगर था। लेकिन फिर भी मालिक ने उससे कहा, ‘ठीक है। मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूं। क्या आप रिटायर होने से पहले एक आखिरी मकान बनाएंगे?’

अपने मालिक का मान रखते हुए उसने अंतिम मकान बनाने के लिए अपनी सहमति दे दी। वह जल्दी से जल्दी उस मकान को बनाकर काम खत्म कर देना चाहता था, इसलिए उसने कई शॉर्टकट तरीके अपनाए और अधूरे प्रयास करते हुए बे-मन से उस मकान को जल्द से जल्द बनाकर तैयार कर दिया। जब मकान बनकर तैयार हो गया, तो मालिक उस मकान का मुआयना करने आया और मिस्त्री के हाथ में उस मकान की चाबी देते हुए कहा, ‘यह मेरी तरफ से आपका रिटायरमेंट गिफ्ट है।‘

कारीगर अवाक रह गया। उसे अपने बनाए आखिरी मकान के प्रति यह सोचकर अफसोस हुआ कि कितना बेहतर होता अगर मैं इस मकान को भी उतने ही उत्साह व लगन के साथ बनाता, जितने आज से पहले तक बनाए थे।

इस कहानी से हम यह सीख सकते हैं
काम चाहे पहला हो या आखिरी, यदि आपने उसे स्वीकार किया है तो उसे पूरे मन से करना चाहिए। अगर कोई काम मन से न कर पाएं, तो उसे अस्वीकार कर दें।

किसी काम को करना स्वीकार करते हैं, तो उसमें हमेशा अपना बेस्ट देने की कोशिश करें। जिस काम में मन नहीं लगे, उसे बेमन से करने से बेहतर है कि अस्वीकार कर दिया जाए।

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