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हांगकांग के अखबार ने लिखा- कश्मीर हमले में खून के छींटे चीन के हाथों पर

Last updated: February 18, 2019 9:22 am
Surabhi Saloni
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9 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली: हाल ही में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले ने भारत में चीन के प्रति भी रोष है। चीन लगातार पाकिस्तान की सरजमीं से भारत के खिलाफ अभियान छेड़े आतंकी संगठनो को संरक्षण देता रहा है। चीन के इस कदम से दोनों देशों के रिश्ते एक बार फिर खटाई में पड़ते नजर आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शुक्रवार को हुए अभी तक के सबसे भयानक आत्माघाती आतंकी हमले में भारतीय सुरक्षा बलों के 40 जवान मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में 350 किलो विस्फोटकों से भरी कार को सुरक्षा बल के 78 वाहनों से टक्कर मार दी थी।  पाकिस्तान की सरजमीं से जैश-ए मोहम्मद आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकी संगठन जैश का चीफ मसूद अजहर कई वर्षों भारत व चीन के रिश्ते के बीच रोड़ा बना हुआ है।

मसूद अजहर पाकिस्तान की धरती से भारत के खिलाफ खुलेआम अभियान चला रहा है तथा भारत पिछले कई सालों से संयुक्त राष्ट्र संघ में मसूद अजहर को आतंकियों की सूची में शामिल करने की कोशिश में लगा हुआ है पर पाकिस्तान की पीछे डटकर खड़ा चीन इसमें हर बार बाधक साबित हो रहा है। वर्ष 2017 से चीन लगातार भारत की कोशिश में यह कह कर अडंगा लगा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति सदस्य इस मुददे पर एकमत नहीं हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक व पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना है कि चीन के हाथ खून से रंगे हैं व यह देश पाकिस्तान के साथ अंधी दोस्ती में डूबा हुआ है। चीन पाकिस्तान के हर गुनाह का साझेदार है। मोदी से भेद होने के कारण सिन्हा ने हाल ही में सत्ताधारी पार्टी से त्यागपत्र दिया है।

भारत-पाक दुश्मनी में क्यों उलझा है चीन

कश्मीर में हाल ही में हुए आतंकी हमले की चीन ने भी विश्व के अन्य देशों की तरह कड़े शब्दों में निंदा की है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अजहर के प्रति उसकी सोच में कोई परिवर्तन नहीं आया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि इस हमले से चीन को गहरा धक्का लगा है और चीन प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता है, पर हम संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली से बंधे हुए हैं।

चीन का यह बयान भारत के लिए गहरा झटका है क्योंकि हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों से अजहर को वैश्विक स्तर आतंकी घोषित कर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान से कहा कि वह शीघ्र आतंकी संगठनों की मदद करना छोड़े दे। हालांकि पाकिस्तान ने इस हमले में अपना हाथ होने से साफ इन्कार किया है।

कुछ माह में ही भारत में आम चुनाव हैं, इस हमले के बाद मोदी सरकार पर भारी दबाव है। दिल्ली में हाई लेवल सुरक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते कहा है कि देश गुस्से में, लोगों के खून में उबाल है। हम इस हमले का जबरदस्त तरीके से मुंहतोड़ जवाब देंगे। वर्ष 2016 में कश्मीर में उड़ी आतंकी हमले के लिए भारत ने जैश को दोषी पाया था और मोदी सरकार ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक कर जोरदार तरीके से जवाब दिया था। इस साहसिक कदम के लिए भारत में मोदी की तारीफ हुई थी, और हाल ही में बॉलीवुड फिल्म ‘उड़ी’ की अपार सफलता ने मोदी को राष्ट्रवादी बाहुबली के रूप में देश में उभारा है।

तवांग में क्यों उलझे हैं चीन, भारत और दलाई लामा

भारत-पाकिस्तान के रिश्ते में हमेशा से तनाव रहा पर चीन अजहर को क्यों बचाने में लगा इस पर भारत में प्रश्न उठने लाजमी हैं। इससे मोदी सरकार को झटका लगा है। जबकि सरकार मोदी-जिनफिंग की दोस्ती को वुहान स्पिरिट के रूप में देश दुिनया में प्रचारित कर रही थी। पिछले वर्ष मोदी व शी-जिनफिंग की चीन के वुहान शहर में वार्ता हुई। इस वार्ता को सफल बताते हुए भारत-चीन के रिश्तों में नए आयाम के रूप में प्रचारित किया गया। एशिया के दो शक्तिशाली देशों की यह वैठक डोकलाम में दो माह तक सैन्य तनाव के बाद हुई औऱ माना जा रहा था इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में मिठास आएगी।

प्रधानमंत्री बनने से पहले विपक्षी नेता के रूप में मोदी तत्कालीन कांग्रेस सरकार को चीन के प्रति नरम रुख को लेकर कोसते थे और डोकलाम में भारत के गर्म रुख ने मोदी को एक बलशाली नेता के रूप में उभारा और चीन को वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा। वुहान वार्ता को सफल बनाने में मोदी की यही दृढ़ संकल्प छवि काम आई । 1962 के युद्ध के बाद भारत चीन के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे और दशकों बाद 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद इनमें और तनाव आ गया।

मोदी के अरुणाचल दौरा चीन को अखरा

मोदी के सत्ता में आने के बाद सरकार चीन के प्रति और सख्त हो गई। फिर उसके बाद चीन के विरोध के बावजूद भारत का प्रतिष्ठित न्यूक्लियर सप्लायर्स समूह में शामिल होना चीन को और अधिक अखरा। पाकिस्तान में चीन की विभिन्न परियोजनाओं पर भारत के विरोध ने आग में घी का काम किया। इसके अलावा भारत व अमेरिका के सुधरते संबंधों ने चीन को और नाराज कर दिया।

सिन्हा ने कहा कि आज वुहान स्पिरिट को खतरा हो गया है। चीन ने हर बार हमें धोखा दिया है और सिखाया है कि उसके लिए उसकी रुचि व फायदे से ज्यादा कुछ और नहीं है। चीन से छपने वाले अखबार साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट को दिए एक बयान में सिन्हा ने कहा कि हमें भी चीन के प्रति एेसी ही सोच विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि पुलवामा आतंकी हमला देश पर हमला है और यह उस आतंकी संगठन का कारनामा है जिसे चीन का संरक्षण प्राप्त है। देश में आने वाले आम चुनाव में मोदी सरकार को देश के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोण

भारत में विपक्षी नेता व विदेशी मामलों की संसदीय स्टैंडिग कमेटी के अध्यक्ष शशी थरूर ने कहा कि पुलवामा हमले की जिम्मेदारी जैश ने ली है। जैश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन का संरक्षण प्राप्त है। इसके बाद वुहान स्पिरिट का क्या होगा जिसका मोदी व स्वयं चीन व्याख्यान करते रहे हैं। क्या इसके तहत भारत व चीन जैश पर लगाम लगा पाएंगे या वुहान स्पिरिट फोटो सेसन मात्र था, थरूर ने पूछा। थरूर ने तायवान व तिब्बत परभारत के न रम पक्ष को लेकर मोदी सरकार कड़े हाथों लिया।

साउथ चाईना मॉर्निंग पोस्ट के सह संपादक जेबिन जैकब मानते हैं कि यह मान्यता है कि चीन पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को संरक्षण प्रदान कर रहा है। फिर मोदी चीन को इस प्रकरण में नहीं घसीटना चाहेंगे जिससे उनकी विदेशी नीति पर आंच आए। आगामी आम चुनाव में मोदी के लिए पाकिस्तान को निशाना बनाना चीन के अपेक्षा ज्यादा फायेदा वाला सौदा साबित होगा।

(यह लेख साउथ चाईना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित हुआ है )

 

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