पाली-मारवाड़। गोडवाड़ अंचल की पावन धरती पर स्थित सुमेर गांव अब एक बार फिर धार्मिक आस्था, प्रकृति की रमणीयता और प्राचीन विरासत के संगम के रूप में चर्चा में है। जोजावर–देसूरी सड़क मार्ग पर स्थित सुमेर गांव में मुख्य सड़क से महज सौ मीटर की दूरी पर प्राचीन जैन तीर्थ है, जहां शांतिनाथ भगवान की अलौकिक प्रतिमा के दर्शन हेतु देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्षों से जर्जर हालत में पड़े सड़क मार्ग के कारण यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी, लेकिन अब सड़क निर्माण की प्रक्रिया टेंडर स्तर तक पहुंचने से जैन समाज सहित समस्त श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर है।
सुमेर जैन मंदिर से आगे अरावली पर्वत श्रृंखला के भीतर, नदी किनारे लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित लोहागर महादेव का प्राचीन मंदिर प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। चारों ओर पहाड़ों से घिरा यह स्थल अपनी शांति और दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु कुछ पल के लिए संसारिक भाग-दौड़ भूलकर प्रकृति और भक्ति में लीन हो जाता है। लोहागर महादेव मंदिर के पीछे विशाल पत्थरों से बनी सीढ़ियों वाली प्राचीन बावड़ी आज भी खड़ी है, जो क्षेत्र की समृद्ध सभ्यता और जल संरचनाओं की अद्भुत स्थापत्य कला का प्रमाण देती है। यह झरोखे वाली बावड़ी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसी मार्ग पर आगे बढ़ने पर पाली जिले की सीमा पार करते ही राजसमंद जिले में स्थित कालेश्वर महादेव मंदिर आता है, जहां भगवान शिव के स्वयं कालेश्वर रूप में विराजमान होने की मान्यता है। अरावली की वादियों और जंगलों के बीच बसे इस मंदिर तक वर्तमान में कच्चे रास्ते से जाना पड़ता है, जिससे बरसात और गर्मी के मौसम में श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुमेर सड़क मार्ग के साथ-साथ इन मंदिरों तक जाने वाले संपर्क मार्गों को भी पक्का किया जाए, तो लाखों शिव भक्तों और जैन श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। विशेष बात यह है कि पहाड़ों और जंगलों से घिरा यह पूरा क्षेत्र गर्मी के दिनों में भी अपेक्षाकृत सुहावना रहता है। ठंडी हवाएं, हरियाली और बहती नदी की कल-कल ध्वनि के बीच दर्शन-पूजन का अनुभव श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। भोर की बेला में मंदिरों की घंटियों और शंखनाद की ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना देती है, वहीं शाम ढलते ही अरावली की पहाड़ियों पर डूबते सूर्य का दृश्य मन को अद्भुत सुकून देता है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रवासी गोडवाड़ वासियों का कहना है कि सुमेर–देसूरी सड़क के निर्माण से न केवल धार्मिक यात्राएं सुगम होंगी, बल्कि सुमेर जैन तीर्थ, लोहागर महादेव और कालेश्वर महादेव-इन तीनों पावन स्थलों को जोड़ने वाला यह मार्ग एक आध्यात्मिक परिक्रमा पथ के रूप में विकसित हो सकता है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ इन पवित्र स्थलों तक पहुंचने वाले संपर्क मार्गों को भी शीघ्र पक्का किया जाए, ताकि गोडवाड़ की यह दिव्य त्रयी आने वाली पीढ़ियों के लिए सहज सुलभ बन सके। “ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क मार्ग को स्वीकृति दिलाने के लिए भरतकुमार सोलंकी द्वारा जयपुर स्तर तक लगातार प्रयास किए गए, जिनके चलते आज यह बहुप्रतीक्षित मांग धरातल पर उतरती नजर आ रही है।”
गोडवाड़ के प्रमुख तीर्थ सुमेर तक अब सुगम होगी यात्रा, श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर

