नई दिल्ली:भारतीय सेना ने उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें यह दावा किया गया कि 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान में चीनी सेना का साथ हिंसक झड़प के दौरान कई भारतीय सैनिक लापता हो गए। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए जबकि चीन को भारी नुकसान हुआ है।
सेना ने एक ब्रीफ स्टेटमेंट में कहा, “यह स्पष्ट किया जाता है कि हिंसक झड़प के दौरान कोई भी भारतीय सैनिक लापता नहीं है।” बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स में इन चाइना – इंडिया क्लैश, टू नेशनलिस्ट लीडर विद लिटिल रूम टू गिव के लेख में भारतीय सैनिकों के लापता होने की बात का जिक्र था।
भारतीय मीडिया के कुछ हिस्से में भी इस यह खबर थी कि कुछ भारतीय जवान लापता हैं। सेना की तरफ से यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब सीमा पर तनाव कम करने के लिए लद्दाख को लेकर मेजर जनरल रैंक के ऑफिसर के नेतृत्व में भारत और चीन के प्रतिनिधिमंड स्तरीय वार्ता हुई।
हाल में सीमा विवाद शुरू होने के बाद यह सातवीं बैठक थी और गलवान में हिंसक झड़प के बाद यह तीसरी बैठक थी। कारू के तीसरे इन्फ्रेंट्री डिवीजन के हेडक्वार्टर के मेजर जनरल अभिजीत बापट और उनके चीनी समकक्षीय ने पेट्रोल प्वाइंट 14 के पास यह बैठक की, जहां पर 45 साल में पहली बार भारत और चीन की सेना के बीच खून बहा है।
साल 1975 के अक्टूबर में चीन के सैनिकों ने अरूणाचल प्रदेश के तुलुंग ला सेक्टर में भारतीय पेट्रोलिंग जवान पर घात लगाकर हमला कर दिया, जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हो गए थे। 15 जून को हुई हिंसा में 76 जवान घायल हे और 18 की हालत गंभीर बनी थी। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उन सभी की हालत अब स्थिर है।

