नई दिल्ली; आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रही एयर इंडिया ने सरकारी एजेंसियों को क्रेडिट पर टिकट जारी करने से इनकार कर दिया है। एविएशन कंपनी का कहना है कि पहले बकाया 268 करोड़ रुपए चुकाए जाएं, इसके बाद नए टिकट जारी किए जाएंगे। इस दशक में यह पहला मौका है, जब एयर इंडिया ने सरकारी एजेंसियों की बकाया राशि को लेकर इस तरह की कोई सूची बनाकर कदम उठाया हो।
इस सूची में सीबीआई, आईबी, ईडी, कस्टम कमीशन, सेंट्रल लेबर इंस्टीट्यूट, इंडियन ऑडिट ब्यूरो, कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स और बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स शामिल है।
हाल ही में एयरलाइन के 800 पायलटों के संघ इंडियन कमर्शियल पाटलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने सरकार को चेतावनी दी कि एयरलाइन के भविष्य को लेकर अनिश्चितताओं की वजह से सब्र टूट रहा है। हम काम करने की स्थिति में नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पायलटों को अक्टूबर का फ्लाइंग अलाउंस अभी तक नहीं मिला है।
आईसीपीए द्वारा सरकार को लिए गए पत्र के मुख्य अंश
- आईसीपीए ने नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर उनके एक बयान का जिक्र किया है। आईसीपीए ने कहा- आपका यह बयान चिंताजनक है कि 31 मार्च 2020 तक एयर इंडिया का निजीकरण नहीं हो पाया तो एयरलाइन बंद करनी पड़ेगी। बता दें पुरी ने पिछले महीने कहा था कि एयर इंडिया का विनिवेश नहीं करेंगे तो इसे चलाने के लिए पैसे कहां से आएंगे। आईसीपीए ने इसी संदर्भ में चिंता जताई है।
- उड्डयन मंत्री को लिखे पत्र के मुताबिक पायलटों को अक्टूबर का फ्लाइंग अलाउंस अब तक नहीं मिला है। उन्होने कहा- हम बंद हो चुकी 21 प्राइवेट एयरलाइंस के कर्मचारियों जैसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहते, जिससे देश में बेरोजगारी बढ़े। बीते 2-3 साल से हम अनिश्चितता में हैं। कई कर्मचारी लोन की किश्त और दूसरे भुगतान नहीं कर पा रहे। ऐसे हालातों में हमारा और परिवार का जीवन प्रभावित हो रहा है।
- एयर इंडिया पर 58,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार एयरलाइन की पूरी हिस्सेदारी बेचने कोशिशों में जुटी है। पिछले साल 76% शेयर बेचने की योजना थी, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला। इस साल बोली की शर्तों में ढील देकर 100% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई गई। मार्च 2020 तक एयर इंडिया के निजीकरण की योजना है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें देरी होने के आसार हैं।

