लखनऊ। जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने सेवा प्रदाता कंपनी (GVK EMRI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए शासन से सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों के विधानसभा का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन दिया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष शरद यादव, महामंत्री नितिन कुमार और कोषाध्यक्ष सुशील पांडेय ने पत्र जारी कर कहा कि कोविड काल में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा देने वाले लगभग 3,000 कोरोना योद्धाओं को बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके अलावा अब तक लगभग 9,000 कर्मचारियों को बेरोजगार कर दिया गया है।
प्रमुख मांगें और आरोप:
सीबीआई (CBI) जांच: एंबुलेंस सेवा में फर्जी केस, फर्जी डीजल और मेंटेनेंस के नाम पर हो रहे करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच हो।
सेवा में वापसी: निकाले गए कर्मचारियों को ससम्मान पुनर्बहाल किया जाए।
वेतन व नियम: ओवरटाइम, बोनस और न्यूनतम वेतन कानून का कड़ाई से पालन कराया जाए।
मानसिक उत्पीड़न पर रोक: काम के नाम पर अनुचित दबाव, फर्जी केस और नौकरी से निकालने की धमकियां बंद हों।
2 अक्टूबर से भूख हड़ताल की चेतावनी:
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि श्रम कानूनों का पालन नहीं कराया गया और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे 2 अक्टूबर 2026 को उप मुख्यमंत्री/स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर भूख हड़ताल करने को बाध्य होंगे।
एंबुलेंस कर्मचारियों ने उठाई आवाज: शोषण व भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI जांच और पुनर्बहाली की मांग

