By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: नियमों के प्रति हो जागरूकता तो निर्मल हो सकता है चारित्र : महातपस्वी महाश्रमण
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

नियमों के प्रति हो जागरूकता तो निर्मल हो सकता है चारित्र : महातपस्वी महाश्रमण

Last updated: August 7, 2026 12:40 am
Surabhi Saloni
Share
3 Min Read
SHARE
Highlights
  • आचार्यश्री ने निर्धारित विषय को आगम के माध्यम से किया व्याख्यायित

लाडनूं । जन-जन को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की प्रेरणा देने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गुरुवार को मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान सुधर्मा सभा में उपस्थित विशाल जनमेदिनी व चारित्रात्माओं आदि को आज के निर्धारित विषय ‘क्या है चारित्र?’ को आगम के माध्यम से व्याख्यायित करते हुए कहा कि मोक्ष तो चार अंगों वाला है।

उसका एक अंग चारित्र है। चारित्र की एक परिभाषा यह होती है कि समता भाव को चारित्र कहा जाता है। इसको मूल भाग में रखने के बाद ही महाव्रत, समिति, गुप्तियां होती हैं। महाव्रत, समितियों व गुप्तियों का प्राण तत्त्व समता भाव होता है। सम भाव है तो अशुभ योग नहीं हो सकता। अशुभ योग का अभाव भी अपने आप में चारित्र की आराधना हो सकता है। पच्चीस बोल का अंतिम बोल है चारित्र पांच। सामायिक को पहला चारित्र कहा गया है। सामायिक चारित्र में सर्व सावद्य योग का तीन करण तीन योग से प्रत्याख्यान होता है। सामायिक चारित्र स्वल्पकालिक और जीवन भर का भी हो सकता है। सर्व सावद्य योग से विरमण हो जाता है तो वह ही बहुत बड़ा होता है। छेदोपस्थापनीय त्याग में पांच महाव्रतों को स्वीकृत कराया जाता है। परिहार विशुद्धि का भी प्रयोग होता है। चौथी बात सूक्ष्म संप्राय। लोभ दसवें गुणस्थान तक भी सूक्ष्म रूप में अस्तित्व में रहता है। यथाख्यात चारित्र अकषाय होता है। समभाव वाली व्यवस्था पहले गुणस्थान से लेकर चौदहवें गुणस्थान तक लागू होती है। साधु एक मुहूर्त तक श्रुत सामायिक लेकर जो स्वाध्याय करता है, वह बहुत अच्छा होता है। यह चारित्र कर्म के संचय को खाली करने वाला होता है। चारित्र के कारण नए कर्मों का आना बंद हो जाता है तो यह बड़ी बात हो जाती है। यह चारित्र की एक निष्पत्ति है। चारित्र के अंतर्गत शुभ योग में तप होता है। चारित्र जिसमें भी होता है, बहुत बड़ी बात होती है। साधु को अपने चारित्र को निर्मल बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। साधु अपने काय गुप्ति का ध्यान रखे। वचन गुप्ति पर भी विशेष ध्यान देने का प्रयास होना चाहिए। इसके साथ मन की चंचलता को भी कम करने का प्रयास करना चाहिए। काय गुप्ति सध जाए तो मन की चंचलता को कम किया जा सकता है। आचार्यश्री ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि प्रेक्षाध्यान के माध्यम से अपने मन की चंचलता को नियंत्रित किया जा सकता है। गुरुदेव तुलसी ने प्रेक्षाध्यान की प्रेरणा भी दी। चलते, बोलते और सोते हुए भी ध्यान किया जा सकता है। तेरह नियमों के प्रति जागरूकता रहे तो चारित्र निर्मल रह सकता है।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article एंबुलेंस कर्मचारियों ने उठाई आवाज: शोषण व भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI जांच और पुनर्बहाली की मांग
Next Article अणुव्रत समिति मुंबई कार्य कारणी मीटिंग व तप अनुमोदना कार्यक्रम

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

विन्ध्य आइकॉनिक बिजनेस अवॉर्ड – सीज़न 2 का भव्य समारोह 7 अगस्त की शाम मुंबई के लोढ़ा एड्रिना सभागार में
Mumbai / Maharshtra
August 7, 2026
‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के लिए अहमदाबाद पहुंचे सनी देओल, करण देओल और प्रीति जी जिंटा, खाई गुजराती थाली
entertainment
August 7, 2026
क्रोध, मोह और अहंकार कर्मबंधन के मूल कारण : पूज्य डॉ. श्री पदमचन्द्रजी म.सा.
social
August 7, 2026
हिसाब बराबर होने का वक्त आ गया: विशेष फिल्म्स की ‘आवारापन 2’ का ट्रेलर रिलीज़, बदले और मुक्ति की रोमांचक गाथा का करता है वादा
entertainment
August 7, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?