- दुधारा पुलिस के तीन कर्मियों पर पत्रकार को कथित तौर पर जबरन थाने ले जाने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप, डीजीपी से लेकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला; सोमवार को अधिकारियों से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
संतकबीरनगर:- रात के करीब 9 बजे पेट्रोल पंप पर मौजूद पत्रकार के पास पुलिसकर्मी पहुंचते हैं। कथित तौर पर इतना कहते हैं—“साहब ने बुलाया है।” इसके बाद पत्रकार को मोटरसाइकिल पर बैठाकर दुधारा थाने ले जाया जाता है। कई घंटे तक पूछताछ होती है और फिर रात करीब 1:30 बजे उन्हें छोड़ दिया जाता है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पत्रकार को थाने क्यों ले जाया गया, बल्कि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इसके लिए कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी?
थाना दुधारा क्षेत्र का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रकार राहुल त्रिपाठी की ओर से पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर जबरन थाने ले जाने, मानसिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। मामले को राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने गंभीरता से लेते हुए डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और बस्ती रेंज के डीआईजी तक शिकायत पहुंचाई है।
पेट्रोल पंप से शुरू हुई, थाने तक पहुंचा मामला
शिकायत के अनुसार, 12 सितंबर की रात करीब 9 बजे पत्रकार राहुल त्रिपाठी दुधारा थाना क्षेत्र स्थित एक पेट्रोल पंप पर मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान थाना दुधारा के पुलिसकर्मी संजय प्रसाद, हरिप्रसाद और मोतीलाल वहां पहुंचे।
पत्रकार पक्ष का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहते हुए साथ चलने को कहा कि “साहब ने बुलाया है।” इसके बाद उन्हें कथित तौर पर मोटरसाइकिल से थाने ले जाया गया। थाने में पूछताछ के दौरान पत्रकार के साथ मानसिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल—अगर गिरफ्तारी नहीं थी तो थाने क्यों ले गई पुलिस?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रतिनिधिमंडल का सवाल है कि यदि पत्रकार के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं था, उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था और केवल पूछताछ करनी थी तो आखिर रात के समय पेट्रोल पंप से थाने लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
संगठन ने पुलिस से मांगा जवाब
पत्रकार को किस कानूनी अधिकार के तहत थाने लाया गया? क्या कोई नोटिस दिया गया था? क्या थाने लाने की कार्रवाई जीडी या रोजनामचा में दर्ज है? क्या पत्रकार को अपनी इच्छा से जाने दिया गया था या पुलिसकर्मी साथ लेकर गए थे? इन सवालों को लेकर अब पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
कार्रवाई की रिकॉर्डिंग सुरक्षित होने का दावा
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि पेट्रोल पंप से थाने ले जाने के दौरान की एक रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इसे जांच अधिकारी और मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने पेट्रोल पंप और थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने की भी मांग की है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
मोबाइल कब्जे में लेने का भी आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। पत्रकार पक्ष का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने पत्रकार का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया था। अब संगठन ने सवाल उठाया है कि मोबाइल किसके आदेश पर लिया गया? क्या इसकी कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई? यदि मोबाइल की जब्ती की गई थी तो उसका मेमो कहां है? पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मोबाइल से संबंधित सभी दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
मामला डीजीपी और मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा
राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह ने देर रात मामले की शिकायत डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और बस्ती रेंज के डीआईजी को ई-मेल के माध्यम से भेजी। शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार का मुद्दा उठाया गया है। ई-मेल में पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता की जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी हवाला दिया गया है। इनमें D.K. Basu, Joginder Kumar और Arnesh Kumar से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।संगठन ने बीएनएसएस के तहत गिरफ्तारी, नोटिस, पूछताछ और हिरासत से संबंधित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच कराने की मांग की है।
रात 1:30 बजे छोड़े जाने के बाद और गरमाया मामला
पत्रकार संगठन का कहना है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ई-मेल भेजे जाने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मामला उठने के बाद राहुल त्रिपाठी को रात करीब 1:30 बजे थाने से जाने दिया गया। करीब साढ़े चार घंटे तक चले पूरे घटनाक्रम को लेकर अब पत्रकार संगठन पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगने की तैयारी में है।
प्रतिनिधिमंडल सोमवार को अधिकारियों से मिलकर रखेगी यह मांग
मामले को लेकर पत्रकार प्रतिनिधिमंडल सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल थाना दुधारा के पुलिसकर्मी संजय प्रसाद, हरिप्रसाद और मोतीलाल के साथ ही थाना प्रभारी अमित कुशवाहा की भूमिका की जांच कराने की मांग करेगा। उक्त मामले में प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख मांगे की है जिनमें पेट्रोल पंप का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच, थाना परिसर के सीसीटीवी की जांच, जीडी और रोजनामचा की जांच, संबंधित पुलिसकर्मियों के ड्यूटी और मूवमेंट रिकॉर्ड की जांच, मोबाइल फोन कब्जे में लेने से जुड़े दस्तावेजों की जांच, घटना की सुरक्षित रिकॉर्डिंग की जांच शामिल हैं।
अब इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई क्या है, इसका जवाब सीसीटीवी फुटेज, जीडी-रोजनामचा और पुलिस रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा। फिलहाल पत्रकार पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस का विस्तृत पक्ष और निष्पक्ष जांच के बाद सामने आने वाले तथ्य ही तय करेंगे कि उस रात आखिर पेट्रोल पंप से दुधारा थाने तक क्या हुआ था।
