कोलकाता:पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान बाईचुंग भूटिया ने पूर्व क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का समर्थन किया, जिन्हें बल्ले से कम होती चमक के कारण प्रशंसकों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
भूटिया ने कहा, ”मुझे लगता है कि वह शानदार रहा है। लोग इस समय उसकी इसलिए आलोचना कर रहे हैं क्योंकि वे बलि का बकरा ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अगर आप इस विश्व कप को देखो तो मुझे लगता है कि उसने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।”
भूटिया को यह भी लगता है कि विश्व कप में वैश्विक अपील की कमी है और उन्होंने तो इसे दक्षिण एशिया कप करार कर दिया जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों में शामिल हैं।
उन्होंने यहां कहा, ”मुझे यह विश्व कप पूरी तरह से दक्षिण एशिया कप लगता है। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भारत के बीच मुकाबले जैसा है। अगले 10 साल में आप देखोगे कि एशियाई टीमें जैसे भूटान और नेपाल भी इसके लिए क्वॉलिफाई कर रही हैं।
इसके साथ ही पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया ने भारतीय फुटबॉल के हितधाराकों से अपना अहंकार छोड़कर देश के घरेलू लीग के लिए कुछ बलिदान देने की मांग की, जो सहमति नहीं बन पाने के कारण अनसुलझा रह गया। आईएमजी रिलायंस समर्थित इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को देश का शीर्ष लीग का दर्जा दिए जाने के खिलाफ आईलीग के अधिकारियों ने बुधवार को अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ से मुलाकात की।
नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात हालांकि बेनतीजा रही और पटेल ने कहा कि दोनों लीग अगले दो वर्षों के लिए ऐसे ही बने रहेंगे। एआईएफएफ को उम्मीद है कि इसके बाद यह कोई समाधान निकलेगा। भूटिया ने कहा अब अहंकार को किनारे करने का समय है।
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि अभी सबसे बड़ी चुनौती अहंकार को खत्म करने की है। यहां किसी को कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ेगा। सब कुछ वैसा नहीं हो सकता जैसा आप चाहते है। हर किसी (एआईएफएफ, आईएसएल, आई-लीग) को कुछ ना कुछ त्याग करना होगा। अपना अहंकार छोड़कर भारतीय फुटबॉल के बेहतर करने के बारे में सोचिए।”
पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, ”अभी हर किसी को कोशिश है अपने क्लब और अपनी लीग को बचाने की है। आईलीग में अलग तरह की चुनौती है, उसकी अपनी सकारात्मक और नकारात्मक चीजें है। ऐसा ही महासंघ और आईएसएल के लिए भी है।” उन्होंने कहा, ”भारतीय फुटबॉल की संरचना जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना अच्छा होगा। महासंघ के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती आईएसएल और आईलीग को लेकर संरचना सही करने की है।”

