तेयुप – सूरत। ये बच्चे अभी तीसरी कक्षा में पढ़ते हैं उम्र इतनी छोटी कि शायद रक्तदान की गंभीरता पूरी तरह समझना भी मुश्किल हो, लेकिन सोच इतनी बड़ी कि किसी अनजान इंसान की जिंदगी बचाने का विचार दिल में आ गया। इन Gen अल्फा बच्चों ने खुद सोचा कि रक्तदान शिविर होना चाहिए और उनकी इसी छोटी-सी सोच ने आज एक ऐसे अभियान को जन्म दिया, जो किसी के जीवन की उम्मीद बन सकता है।
सोचिए…
जिस उम्र में बच्चे अपने खिलौनों, खेल और अपनी छोटी-छोटी खुशियों के बारे में सोचते हैं, उस उम्र में इन बच्चों ने किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी के बारे में सोचा। यही संस्कार हैं यही सच्ची शिक्षा है और यही है, छोटी उम्र में बड़ी सोच। इनके हाथ भले ही छोटे हैं, लेकिन इनके विचारों में किसी की जिंदगी बचाने की ताकत है। क्योंकि बदलाव हमेशा बड़े लोगों से नहीं आता, कभी-कभी एक छोटे बच्चे की बड़ी सोच पूरी पीढ़ी को प्रेरित कर देती है। नहीं मायने रखता हैं कितने यूनिट हुए, मायने यह रखता हैं कि दृढ़ विश्वास कितना बड़ा है इन नन्हे कदमों से प्रेरणा लेंने का समय हैं, किसी अनजान के जीवन में उम्मीद बननें की नन्ही उम्र, निर्मल मन, विशाल सोच, इन बच्चों को दिल से सलाम! “संकल्प से सिद्धि”
अविस्मरणीय रक्तदान शिविर
Highlights
- नन्ही उम्र… बड़ी सोच… और इंसानियत का सबसे बड़ा सबक!

