विहार मार्ग में ग्रामीणों को शांतिदूत ने प्रदान की पावन प्रेरणा, आचार्यप्रवर ने की साधारण धर्म की व्याख्या
नालट्टिनपुत्तुर, तुतुकुड़ी, तमिलनाडु: दक्षिण भारत की धरा पर अपनी अहिंसा यात्रा के साथ ज्ञान का अलोक बांटते हुए गतिमान तीर्थंकर के प्रतिनिधि, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी विल्लीसेरी स्थित पंचायती यूनियन प्राइमरी स्कूल से लगभग 9 कि.मी. का विहार कर एस.एफ.एस. मेट्रिकुलेशन हाई स्कूल, नालट्टिनपुत्तुर में पधारे।
विहार मार्ग के दौरान चलने वाली हवाए आज सूरज की तेज धूप में कुछ शीतलता प्रदान कर रही थी। मार्ग में साथ चलने वाले कार्यकर्त्ता जब स्थान-स्थान पर ग्रामीणों को अहिंसा यात्रा का पेम्पलेट बांट रहे थे तो उसे पढ़कर स्थानीय जन श्रद्धा भाव से आगे बढ़ कर शांतिदूत के चरणों में शीष झुका रहे थे। आचार्यप्रवर ने अनेक ग्रामीणों को नशामुक्ति की प्रेरणा प्रदान की। एस.एफ.एस. मेट्रिकुलेशन हाई स्कूल, नालट्टिनपुत्तुर के विद्यार्थियों ने पंक्तिबद्ध हो वन्दे गुरुवरम की ध्वनि कर आचार्यश्री का स्वागत किया।
यहां आयोजित सत्संग सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को अमृत देशना देते हुए आचार्यप्रवर ने फरमाया- जीवन में आदमी का व्यवहार धर्मार्जित होना चाहिए। जैसे महान लोगों ने आचरण किया है, जीवन जीया है। व्यक्ति ऐसा जीवन जीने का प्रयास करे। अच्छा आचरण करने वाला व्यक्ति निंदा, गरहा बच सकता है। एक कथानक के माध्यम से सरल धर्म की व्याख्या करते हुए आचार्यश्री ने आगे कहा कि साधारण धर्म का पालन करने के लिए सात बिन्दु है जिनमें पहला है- सुपात्रदान। व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए कि शुद्ध साधु को ‘महाव्रती को दान देने का मौका मिले। दूसरा व्यक्ति को गुरुजनों के प्रति, संतों के प्रति विनयभाव रखना चाहिए। सभी प्राणियों के प्रति दया भावा रहे, अपनी और से किसी को कष्ट नहीं देना यह तीसरा बिन्दु है। पांचवां व्यक्ति को न्यायपूर्ण वृत्ति रखनी चाहिए। किसी के प्रति अन्याय न हो यह भावना भीतर में रहे। छठे सूत्र की व्याख्या करते हुए आचार्यश्री ने कहा- जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। धन, सत्ता का घमंड नहीं करना। व्यक्ति सत्ता का सदुपयोग करे। अंतिम बात है कि संगति अच्छी करनी चाहिए। सत्संगति व्यक्ति को अच्छे मार्ग पर ले जाती है। व्यक्ति दुर्जन की संगति से बचने का प्रयास करे एवं सज्जनों की संगति करे। सभी इस पर मनन करे, चिंतन करे। अणुव्रतों, छोटे-छोटे नियमों के समाचरण से व्यक्ति का जीवन सफल बन सकता है।
कार्यक्रम पश्चात् स्कूल के प्रिंसिपल फादर अमृताराजन ने ज्योतिचरण के स्वागत में विचार रखते हुए कहा कि आज ऐसा लग रहा मानों हमारे स्कूल में भगवान पधारे है, पूरा स्कूल अध्यात्ममय बन गया है। अहिंसा यात्रा द्वारा आप महान कार्य कर रहे है।
छोटे-छोटे व्रतों से जीवन सफल बनाए: आचार्य महाश्रमण

