मुंबई। समण संस्कृति संकाय के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, चेंबूर में जैन विद्या एवं सम्यक दर्शन प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या, विदुषी साध्वी श्री निर्वाण श्री जी (ठाणा-6) के पावन सान्निध्य में दो चरणों में आयोजित किया गया। आध्यात्मिक त्याग के साथ सभी ने भवन में प्रवेश किया । प्रथम चरण में साध्वी श्री जी के मंगलमय नमस्कार महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जैन विद्या के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत जैन विद्या गीतिका ने वातावरण को आध्यात्मिक भावों से सराबोर कर दिया।
चेंबूर केंद्र व्यवस्थापिका श्रीमती वनिता हिरण ने स्वागत उद्बोधन देते हुए जैन विद्या की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन विद्या केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसे अपने जीवन और आचरण में उतारना ही इसकी वास्तविक सार्थकता है।
इसके पश्चात पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से जैन विद्या की स्थापना से लेकर वर्ष 2025 तक की अविस्मरणीय यात्रा और उपलब्धियों का सुंदर चित्रण किया गया। साथ ही आगम सहयोगी श्रीमती वनिता बाफना ने आगम की यात्रा और उसके विकासक्रम को भी पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया।
सभा अध्यक्ष श्री लक्ष्मण जी कोठारी ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। साध्वी डॉ. योगक्षेम प्रभा जी ने जैन विद्या एवं आगम के महत्व पर प्रेरणाप्रद पाथेय प्रदान करते हुए अपने संस्मरण भी साझा किए।
“आज के युग में जैन विद्या क्यों आवश्यक है?” विषय पर जैन विद्या प्रशिक्षकों द्वारा प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में साध्वी श्री निर्वाण श्री जी ने जैन विद्या, आगम एवं सम्यक दर्शन की महत्ता बताते हुए फरमाया कि जैन विद्या लोकोत्तर विद्या है, जो इस लोक में तो मार्गदर्शन करती ही है, साथ ही परलोक में भी सहायक बनती है। उन्होंने कहा कि समण संस्कृति का मुख्य ध्येय मोक्ष है और उसके लिए रत्नत्रयी की आराधना आवश्यक है।
द्वितीय चरण में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन विद्या परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर वरीयता प्राप्त करने वाली धनिष्ठा हिरण एवं देवांशी लोढ़ा सहित 8 विज्ञ उपाधिधारकों का सम्मान किया गया, जिनमें एक पति-पत्नी का युगल भी शामिल था। साथ ही जैन विद्या प्रशिक्षकों, विशेष योग्यता एवं सामान्य योग्यता प्राप्त विद्यार्थियों तथा सम्यक दर्शन कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आगम प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती वनिता बाफना द्वारा आध्यात्मिक प्रश्नों पर आधारित लकी ड्रॉ का भी आयोजन किया गया, जिसने सभी की उत्सुकता और सहभागिता को बढ़ाया।
जैन विद्या परीक्षा की राष्ट्रीय सह-संयोजिका श्रीमती प्रेमलता सिसोदिया ने जैन विद्या के विभिन्न आयामों की विस्तृत जानकारी देते हुए अधिकाधिक विद्यार्थियों को जैन विद्या से जोड़ने तथा अधिक संख्या में परीक्षा फॉर्म भरवाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जैन विद्या परीक्षा की राष्ट्रीय सह-संयोजिका श्रीमती प्रेमलता सिसोदिया, हार्बर लाइन संयोजिका श्रीमती अनीता सियाल, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती ममता कच्छारा, मंत्री श्रीमती पायल मांडोत, सभा अध्यक्ष श्री लक्ष्मण जी कोठारी, तेरापंथ युवक परिषद मंत्री श्री कपिल मेहता, भूतपूर्व जैन विद्या केंद्र व्यवस्थापिका श्रीमती कंचन सोनी, श्रीमती अंजू कोठारी , श्रीमती क्रांति जी सुराणा तथा ज्ञानशाला मुख्य प्रशिक्षिका श्रीमती सारिका बोहरा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती कल्पना परमार, श्रीमती निर्मला बड़ाला, श्रीमती विद्या कोठारी, श्रीमती वर्षा मांडोत, श्रीमती उषा बोलिया, श्रीमती कुलदीपा कुमठ एवं श्रीमती साधना धाकड़ का विशेष सहयोग रहा। पीपीटी निर्माण में कन्या मंडल सह-संयोजिका मिस्टी सिंघवी एवं मित्तल बाफना का उल्लेखनीय योगदान रहा। अप्रत्यक्ष रूप से तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष श्री हिमांशु गन्ना तथा भूतपूर्व केंद्र व्यवस्थापक श्री सुशील हिरण का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का कुशल एवं सुव्यवस्थित संचालन सह-केंद्र व्यवस्थापिका श्रीमती टीना हिरण द्वारा किया गया तथा आभार ज्ञापन तेरापंथ इतिहास सहयोगी श्रीमती निर्मला बड़ाला ने प्रस्तुत किया।
- रिपोर्ट दीपक राठौड़

