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Reading: चौरासी लाख जीव योनियों में मानव जीवन अतिमहत्त्वपूर्ण : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण
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चौरासी लाख जीव योनियों में मानव जीवन अतिमहत्त्वपूर्ण : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

Last updated: December 10, 2025 8:17 pm
Surabhi Saloni
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4 Min Read
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Highlights
  • 10 कि.मी. का विहार कर गुड़ा रामसिंह में पधारे तेरापंथाधिशास्ता
  • श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का किया भावभीना अभिनन्दन
  • साध्वीप्रमुखाजी ने श्रद्धालु जनता को किया उद्बोधित
  • स्वागत में श्रद्धालु जनता ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

गुड़ा रामसिंह, पाली (राजस्थान)। बुधवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी जाणुन्दा से गुड़ा रामसिंह की ओर गतिमान हुए। मार्ग में कहीं विद्यार्थियों को तो कहीं ग्रामीण जनता को पावन आशीर्वाद देते हुए और लगभग दस किलोमीटर का विहार कर गुड़ा रामसिंह में पधारे तो गुड़ा रामसिंह की जनता ने अपने आराध्य का भावभीना स्वागत किया। आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ श्री पारसमल गादिया के निवास स्थान में पधारे।
‘महाश्रमण समवसरण’ में आयोजित मंगल प्रवचन में उपस्थित जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मानव जीवन को दुर्लभ बताया गया है। दुर्लभ होने के साथ-साथ मानव जीवन अति महत्त्वपूर्ण भी होता है। चौरासी लाख जीव योनियों में मानव जीवन मिलता है और उसमें आदमी धर्म की साधना कर लेता है तो बहुत ही अच्छा कार्य हो जाता है। मनुष्य जीवन में ही केवलज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। मनुष्य जन्म ही ऐसा है, जिसमें आदमी सरागता से वीतरागता को प्राप्त कर सकता है। सराग से वीतराग बन जाना बहुत बड़ी बात है। सौभाग्य से यह मानव जीवन हम सभी को अभी प्राप्त है। इस जीवन में आदमी को धर्म की आराधना-साधना करने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान के माध्यम से आदमी सन्मार्ग पर चल सकता है और दूसरों को भी सन्मार्ग पर चलने को प्रेरित कर सकता है। ज्ञान अपने आप में परम पवित्र होता है। अनेकानेक विषयों का ज्ञान किया जा सकता है।
ज्ञान प्राप्ति के लिए दुनिया में कितने-कितने विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय आदि-आदि संचालित होते हैं। आदमी को जहां से भी संभव हो सके, ज्ञान का अर्जन करने का प्रयास करना चाहिए। साधुओं की संगति, प्रवचन श्रवण से भी अच्छे ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। आज तो यंत्रों के माध्यम से प्रवचन श्रवण का लाभ भी मिल सकता है। आदमी को सम्यक् ज्ञान की प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। जिस परिवार से साधु-साध्वियां बन जाते हैं, उस परिवार के लिए बड़ी बात हो सकती है। आदमी के भीतर वैराग्य न भी आए तो भी आदमी धर्म के मार्ग पर चलता है तो उससे भी जीवन का कल्याण हो सकता है। आदमी को अणुव्रत के छोटे-छोटे नियम आ जाएं तो जीवन अच्छा बन सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि आज गुड़ा रामसिंह आए हैं। प्राचीनकाल में यह चतुर्मास का स्थान भी रहा है। आज यहां इतने लोगों का आना हो गया है। सभी में अच्छी धार्मिक भावना बनी रहे। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने गुड़ा रामसिंह के लोगों को उद्बोधित किया। अपने आराध्य के स्वागत में स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष श्री गौतमचन्द गादिया व श्री माणकचन्द गादिया ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। गुड़ा रामसिंह के बच्चों ने भी अपनी प्रस्तुति दी। संसारपक्ष में गुड़ा रामसिंह से संबद्ध मुनि प्रितकुमारजी ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। श्री अभिनंदन गादिया, श्री जेपी गादिया तथा श्री इन्दरचंद गादिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

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