विकास धाकड़/मुंबई। मुनि श्री मुकुल कुमार जी के पावन सान्निध्य में बोरीवली में रात्रिकालीन प्रवचन एवं संवाद कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने अपने-अपने संस्थागत कार्यों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। श्री महेंद्र जी भंसाली ने सभा की समर्पित सेवाओं की ओर संकेत करते हुए बताया कि संस्था धर्मसंघ की आज्ञानुवर्ती बनकर अनेक गतिविधियों को दिशा देती है। उन्होंने संघ संगठनों में समन्वय और सेवा भावना की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने वर्तमान समय में समाज को एकसूत्र में जोड़ने हेतु संवाद और सहयोग की महत्ता पर भी बल दिया।
क्उन्होंने श्रावक समाज को सक्रिय रहकर धर्म के कार्यों में निरंतर सहभागी बनने का आह्वान किया। श्रीमती संगीता जी सिंघी, अध्यक्षा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, बोरीवली श्रीमती संगीता जी सिंघी ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि मुनि श्री के तीन दिवसीय प्रवास को सफल बनाने में समाज के प्रत्येक वर्ग महिला मंडल, युवक परिषद, किशोर मंडल, कन्या मंडल और सभा के सदस्यों ने अद्वितीय भूमिका निभाई। उन्होंने प्रमुख कार्यकर्ताओं के नाम लेकर उनके योगदान का आदरपूर्वक उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समवेत प्रयास में सभी सदस्यों की सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द ने आयोजन को स्मरणीय बना दिया। उनके अनुसार ऐसी गतिविधियाँ सामाजिक एकता और धर्म भावना को दृढ़ करती हैं। श्रीमती चंदा जी धाकड़, तेरापंथ कन्या मंडल,प्रभारी श्रीमती चंदा जी धाकड़ ने कन्या मंडल की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि कैसे यह मंडल बालिकाओं में संस्कार, संस्कृति और आत्मविश्वास विकसित कर रहा है। उन्होंने सहभागिता और निरंतर अभ्यास को सफलता की कुंजी बताया। श्री लव जी बोराणा, तेरापंथ किशोर मंडल संयोजक श्री लव जी बोराणा ने किशोर मंडल की गतिविधियों को साझा करते हुए यह बताया कि यह मंच युवाओं को जीवन के प्रारंभिक काल में ही संयम, सेवा और धर्म से जोड़ने का माध्यम बनता जा रहा है।
उन्होंने किशोरों की जागरूक भागीदारी की सराहना की। श्री हितेश जी डागलिया,तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष श्री हितेश जी डागलिया ने बताया कि परिषद ने मुनिश्री के प्रवास में पूरी तन्मयता से भूमिका निभाई, चाहे वह व्यवस्थाओं का प्रबंधन हो या अन्य संघीय दायित्वों का निर्वहन। उन्होंने युवाओं के माध्यम से धर्म को आधुनिक संदर्भों में सक्रिय बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। मुनिश्री का प्रवचन मर्यादा, साधना और संघीय चेतना का संदेश प्रवचन के मुख्य भाग में मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने जीवन को धर्ममय बनाने हेतु अत्यंत प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा धर्म केवल वक्तव्यों तक सीमित न रहे, वह जीवन की कार्यशैली बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय के साथ धर्मसंघ में जिन समसामयिक नियमों का निर्माण किया गया है, वे मात्र परंपरा निभाने हेतु नहीं, अपितु साधकों को अनुशासन,जागरूकता, और संगठनात्मक एकता की ओर अग्रसर करने हेतु बनाए गए हैं। ये नियम शास्त्रों की मर्यादा, संघ की प्रतिष्ठा, और युग की आवश्यकता को ध्यान में रखकर संघीय संतों द्वारा विनिर्मित किए गए हैं, जिनका पालन हर श्रावक के लिए साधना के मार्ग को स्पष्ट और सहज बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघीय मर्यादाओं की अनुपालना आत्मशुद्धि, चरित्रबल और सामूहिक साधना का मूलाधार है। उन्होंने धर्मसंघ के प्रति कर्तव्यबोध को जाग्रत करते हुए कहा कि हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि हम संघ के ऋण से उऋण हों,और उसका सर्वोत्तम उपाय यही है कि हम स्वयं को शासन की सेवा, साधना और संघीय कार्यों के लिए समर्पित रखें। उन्होंने बोरीवली समाज की सक्रियता और समर्पण की सराहना करते हुए आगामी चातुर्मास में और अधिक सेवा, उपासना और अनुशासन के साथ जुड़ने की प्रेरणा दी। प्रवचन से पूर्व ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं और ज्ञानार्थी परिवारों के लिए मुनि श्री के सान्निध्य में एक विशिष्ट सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में शिक्षिकाओं को शिक्षण में आध्यात्मिक भावनाओं का समावेश करने, संयमित जीवनशैली अपनाने, और बच्चों को जैन संस्कारों से जोड़ने हेतु मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। यह संध्या एक ओर जहाँ संघ के अनुशासन, सेवा भावना और साधना पर केंद्रित रही, वहीं दूसरी ओर समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी ने इसे प्रेरणादायी बना दिया। मुनिश्री के सरल, स्पष्ट और हृदयस्पर्शी प्रवचन ने श्रोताओं के अंतर्मन को छू लिया और साधकत्व की दिशा में नए संकल्पों को जन्म दिया। इसको सफल बनाने में श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद,तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ किशोर मंडल, तेरापंथ कन्या मंडल, बोरीवली एवं पुरे समाज का सराहनीय सहयोग एवं सहभागिता रही.!
बोरीवली धार्मिक श्रद्धा, संघ सेवा और आत्मोन्मुखी प्रेरणा से सजी आध्यात्मिक साधना की समर्पित संध्या

