बृहत् मंगलपाठ एवं मन्त्रोच्चार से मिलती है अद्भुत शक्तिः साध्वीश्री निर्वाणश्री जी
धुलिया। शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्री जी के पावन सन्निधि में नए वर्ष के नवप्रभात की पहली किरण नया संदेश लेकर आई। विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्री जी एवं सहवर्ति साध्वीवृंद के समवेत स्वरों में मंत्रोच्चार की मंगल ध्वनि से वातावरण पवित्र बन गया। साध्वीश्री ने नमस्कार महामंत्र मंत्र के मंगल संगान के साथ
आज के अनुष्ठान का शुभारंभ किया। सस्वर भक्तामर, चौबीस जिन स्तुति, आचार्य स्तुति, पार्श्व स्तुति, महावीर अष्टकम् एवं भगवान महावीर अभ्यर्थना की स्वरलहरियों से पूरा वातावरण स्वरमय हो गया। आत्मरक्षा कवच, दिशाद्वार रक्षा के साथ-साथ “प्रभु भज” गीत का साध्वीवृंद ने समवेत स्वरों में संगान किया। प्रातः 9.00 से 10.00 बजे तक 1घंटा अस्खलित मंत्रपाठ एवं स्तुति पाठ के पश्चात -बृहत् मंगलपाठ से हुआ। इस उपक्रम को अभूतपूर्व बताते हुए सबने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। भाई -बहनों की उपस्थिति सराहनीय रही।
बलिप्रतिपदा एवं गुजराती नववर्ष पर विशेष अनुष्ठान

