पंकज श्रीवास्तव/पटना। कोरोना के भय से पूरा बिहार बेहाल है। भय और घर के दहलीज में कैद लोगों की निगाह बिहार सरकार के उस रिपोर्ट पर टिकी रहती है। जिसमें कोरोना प्रभावितों की नयी लिस्ट या संख्या जारी करता है। जिसका सैम्पल रिपोर्ट आया है। इधर लोगों को उस रिपोर्ट से विश्वास उठने लगा है। वो सोचने को बाध्य हैं कि जाँच के नाम पर आखिर क्या हो रहा है? क्या जाँच भी हो रही है या खानापूर्ती हो रही है।
अभी 2 दिन पहले खाजपुरा की महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी। जाँच रिपोर्ट भी ऐरे गैरे अस्पताल ने जारी नहीं किया था पटना के एम्स जारी किया था। अब उसी रिपोर्ट को नेगेटिव बताया जा रहा है। खाजपुरा के जिस महिला का रिपोर्ट पॉजिटिव बताया गया था लोग उसके विषय में जानने के लिए बेचैन थे कि उसका ट्रैवल हिस्ट्री कुछ था ही नहीं तो ये बीमारी आयी कहाँ से? जाहिर है महिला पिछले 1 महीने से अपने घर में बंद थी। उसके सम्पर्क में आये लोगों और करीबियों का जो सैंपल टेस्ट लिया गया था, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आयी। ये बात गौर करने वाली है कि उसका सैम्पल एनएमसीएच और आरएम आरआई में भी भेजा गया था। अब सवाल है एम्स की रिपोर्ट को क्यूँ जारी कर दिया गया जबकि क्रास रिपोर्ट एनएमसीएच और आरएम आरआई से भी आनी थी। इससे पहले भी वैशाली के युवक के साथ भी बका हुआ था। सवाल है बिहार सरकार अपनी फजीहत कराने पर क्यूँ तूला है?
बिहार सरकार की कोरोना जांच रिपोर्ट पर सवालिया निशान!

