आमों के डिसइन्फेक्शन की प्रक्रिया लासलगांव स्थित कृषक केंद्र में की जाती है। इस साल इसकी शुरुआत 10 अप्रैल से हुई है। इस केंद्र की स्थापना भाभा परमाणु संशोधन केंद्र ने की थी। यहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ऐग्रो सर्च ईरेडीयेटर्स (इंडिया) प्रा. लि. कंपनी ने इस साल 110 मेट्रिक टन हापुस, केसर और आमों का अमेरिका को निर्यात किया है।
1000 टन निर्यात का लक्ष्य
अमेरिका सहित कई देशों के नियमों के अनुसार आमों सहित विभिन्न फलों और सब्जियों का डिसइन्फेक्शन इसलिए किया जाता है, ताकि उनके भीतर संभावित तौर पर मौजूद सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट कर दिया जाए। इस साल अकेले अमेरिका को ही 1,000 टन आमों के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। वाशी स्थित एपीएमसी थोक फल व्यापारियों के अनुसार, अमेरिका के लिए रखे गए इस लक्ष्य को जुलाई तक आसानी से पूरा कर लिया जाएगा।
9 राज्यों की सहभागिता
आम व्यापारियों ने बताया कि इस साल देश के 9 राज्यों से आमों का निर्यात किया जा रहा है। इनमें महाराष्ट्र के अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की प्रमुख हिस्सेदारी है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के अलावा एशिया और यूरोप के कई देशों को आमों का निर्यात किया जा रहा है। इससे भारत को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है।

